नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद प्रदेश सरकार तीर्थ नगरी हरिद्वार में कुष्ठ रोगियों के आश्रम के मामले में जाग गयी है। सरकार ने कुष्ठ रोगियों के आश्रम के लिये फंड जारी कर दिया है। इस पर जल्द काम शुरू हो जायेगा। सरकार की ओर से यह जानकारी मंगलवार को उच्च न्यायालय को दी गयी। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष देहरादून की एक्ट नाउ वेलफेयर सोसाइटी नामक गैर सरकारी संस्था की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई।
स्वास्थ्य महानिदेशक लता साह अदालत में वर्चअुली पेश हुई। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कुष्ठ रोगियों के आश्रम के लिये 4.10 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर दी गयी है। पहली किश्त के रूप में 1.64 करोड़ की धनराशि जारी कर दी गयी है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि सेल्टर होम पर काम जल्द शुरू हो जायेगा। डीजी हेल्थ ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा हरिद्वार को सौंपी गयी है लेकिन इस मामले की वह भी खुछ निगरानी करेंगी। इसके बाद अदालत ने सरकार के जवाब से संतुष्ट होते हुए अगली सुनवाई के लिये 31 अक्टूबर की तिथि नियत कर दी।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता की ओर से उच्च न्यायालय को एक पत्र लिखकर कहा गया था कि वर्ष 2018 में राष्ट्रपति की यात्रा के मद्देनजर प्रशासन ने गंगा माता कुष्ठ आश्रम के कुष्ठ रोगियों के आश्रय स्थलों को हटा दिया था। सरकार कुष्ठ रोगियों के पुनर्वास के लिये कोई कदम नही उठा रही है। कुष्ठ रोगी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। इसके बाद अदालत ने पत्र का संज्ञान लेते हुए इस मामले में एक जनहित याचिका दायर कर ली थी। साथ ही सरकार को उचित कदम उठाने के निर्देश भी दिये थे।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जागी सरकार
