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दिल्ली पुलिस विश्वसनीय नहीं

नई दिल्ली : बृजभूषण शरण सिंह को क्लीन चिट देने के लिए दिल्ली पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि जिस तरह से पुलिस ने बृजभूषण मामले में काम किया है उससे उसकी विश्वसनीयता घटी है और लोगों का उससे भरोसा कम हुआ है। सुप्रिया श्रीनेत ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ 1000 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया है जिसमें 500 पन्नों में इसी बात का जिक्र है कि उसे क्लीन चिट क्यों दी गई और उस पर लगे बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉस्को) को किस आधार पर हटाया गया है।
उन्होंने कहा कि एक नाबालिग लड़की आरोपी बृजभूषण जैसे बड़े आदमी के खिलाफ पोस्को की शिकायत दर्ज कर यौन शोषण का आरोप लगाया, लेकिन इसके बाद सारा तंत्र, पुलिस, मंत्री और सांसद मिलकर बृजभूषण को संरक्षण दिया जाता है। इससे साबित होता है कि आज भारतीय जनता पार्टी का नारा – ‘बेटी डराओ-बृजभूषण बचाओ’ हो गया है।
उन्होंने कहा कि पोस्को की शिकायत पर आरोपी को तुरंत हिरासत में लिया जाता है, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कुछ नहीं होता है। वह मीडिया में इंटरव्यू देकर मेडल को 15 रुपए का बताता है, रैलियों में शक्ति प्रदर्शन करता है। दिल्ली पुलिस 45 दिन तक पूछताछ तक नहीं करती और उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद प्राथमिकी दर्ज होती है।
अनुराग ठाकुर को भी घेरा और कहा कि उन्हें सरकार को बताना चाहिए की खेल मंत्री को कैसे पता चला कि 15 तारीख तक चार्जशीट फाइल हो जाएगी। चार्जशीट दिल्ली पुलिस ने लिखी या भाजपा कार्यालय में लिखी गई। कमाल तो यह है कि जिन बेटियों के साथ श्री मोदी फोटो खिंचाते थकते नहीं थे, आज उनके खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने हमेशा आरोपियों और बलात्कारियों को संरक्षण देने का ही काम किया है। भाजपा ने कुलदीप सिंह सेंगर, चिन्मयानंद कांड, लखीमपुर चीरहरण, उत्तराखण्ड की अंकिता, हाथरस की गुड़िया, इन सभी मामलों में आरोपियों को संरक्षण दिया है। अब उन्हें सिर्फ देश की न्यायपालिका पर ही भरोसा है और उन्हें विश्वास है कि देश की न्यायपालिका इसका संज्ञान लेगी।

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