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विकास की गति में प्रकृति का दोहन हो शोषण नहीं

भोपाल : गिरीश गौतम ने आज कहा कि विकास की गति में प्रकृति का दोहन हो शोषण नहीं, हमें पेड़ के फल खाने हैं, पेड़ को उखाड़ कर नहीं फेंकने हैं। आधिकारिक जानकारी में यहां बताया गया कि श्री गौतम ने लोकसभा के स्‍पीकर एवं राज्‍यों के विधानसभा के अध्‍यक्षों के साथ दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर आज मुंबई में राष्‍ट्रीय विधायक सम्‍मेलन 2023 का शुभारंभ किया। मुंबई के रिलायंस जियो सेंटर में आयोजित हो रहे तीन दिवसीय राष्‍ट्रीय विधायक सम्‍मेलन में देशभर से विधानसभा और विधान परिषदों के लगभग 5 हजार सदस्‍यों के साथ ही सभी विधानसभाओं के अध्‍यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, मंत्रि एवं विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव, सचिव एवं अन्‍य अधिकारीगण भाग ले रहे हैं।
मध्‍यप्रदेश विधानसभा के अध्‍यक्ष के साथ ही प्रदेश के 49 विधायक, प्रमुख सचिव ए पी सिंह एवं अन्‍य अधिकारी भी सम्‍मेलन में भाग ले रहे हैं। आज राष्‍ट्रीय विधायक सम्‍मेलन 2023 में ‘सतत विकास के उपकरण एवं प्रभाव’ विषय पर आयोजित सत्र की अध्‍यक्षता विधानसभा अध्‍यक्ष श्री गौतम ने की। अपने अध्‍यक्षीय उद्बोधन में श्री गौतम ने कहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ द्वारा निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए सभी राष्‍ट्र संकल्‍पित हैं, भारत भी ऐजेंडा-30 का एक हस्‍ताक्षरकर्ता है। हमें इन सतत विकास लक्ष्‍यों की प्राप्ति पर फोकस करना है।
गौतम ने कहा कि विकास समावेशी होना चाहिए। लेकिन, विकास की दौड़ में यह अत्‍यंत आवश्‍यक है कि हमें अपने पर्यावरण को भी बचाए रखना है। विकास की गति में प्रकृति का दोहन करने की जगह शोषण शुरू हो जाए यह नहीं होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि हमें पेड़ के फल खाना है, पेड़ को उखाड़ कर उसकी जड़ नहीं खाना है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सभी राज्‍यों में विधायकों को अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए विधायक निधि मिलती है। यदि उस विकास निधि को ग्राम पंचायतों के माध्‍यम से गांवों के विकास के लिए बनने वाली ग्राम पंचायत विकास योजना में लगाएं तो सतत विकास लक्ष्‍यों को प्राप्ति की दिशा में तेजी से बढ़ सकते हैं। श्री गौतम ने उम्‍मीद जताई कि इस सत्र में देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए विषय के विशेषज्ञ इस पर महत्‍वपूर्ण जानकारी साझा करेंगे और यहां एक सार्थक विचार मंथन होगा।
गौतम ने कहा कि विकास में महिला सशक्तिकरण भी एक महत्‍वपूर्ण आयाम है। इस विषय पर भी अलग अलग विचार आए हैं। उन्‍होंने कहा कि पूरे देश में शराब बंदी जैसे सुझाव प्रासंगिक नहीं है, इसकी बजाए हमें सामाजिक जागरूकता पर ध्‍यान केंद्रित करना चाहिए। प्रमुख सचिव सिंह ने भी संसदीय प्रणाली पर आयोजित सत्र में अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विधानसभा अध्‍यक्ष गौतम को समृति चिन्‍ह देकर सम्‍मानित भी किया गया।

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