श्रद्धालुओं पर बरसेगी सृष्टि-पालनहार संग सृष्टि संहारक एवं सृजनकर्ता की दोगुनी कृपा
कुछ इस तरह करें विष्णु-प्रिया लक्ष्मी से प्रार्थना और शिव-पार्वती परिवार का जलाभिषेक
अधिक माह के 2 सावन में पूजा-अर्चना का है विशेष महत्व
संक्षिप्त सार से समझें, क्यों खास है इस साल के दो सावन
मुस्कान शर्मा | गौरवशाली भारत
सावन का महिना भगवान भोलेनाथ को मनाने यानी प्रसन्न करने के लिए बेहद ही खास माह माना जाता है। श्रावण महिने में ही देवी पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पाने के लिए तपस्या की थी और भगवान शिव को नीलकंठ का नाम भी इसी माह में समुद्र मंथन के दौरान विषपान करने से प्राप्त हुआ था। इसलिए हिंदू पौराणिक मान्यता के अनुसार सावन का महीना शिव श्रद्धालुओं के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना से भगवान शिव प्रसन्न होने के साथ भक्तों की मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति करते हैं। 2023 के सावन की बात करें तो इस साल अधिक महिने के चलते एक साथ 2 सावन आए हैं।

एक साथ आए 2 सावन, परिपूर्ण होगी श्रध्दालुओं की मनचाही अभिलाषा
वैसे तो सावन का महीना 30 दिनो का होता है। लेकिन, इस साल यह पूरे 59 दिन यानी 2 महीने तक चलेगा। महान ज्योतिषाचार्यों, विद्वानों एवं बुद्धि जिवियों के मुताबिक एक साथ आए 2 सावन से परिपूर्ण होगी श्रध्दालुओं की मनचाही अआकांक्षाए। जी हाँ, बिल्कुल! हिंदू पंचांग अनुसार ऐसा इसलिए होनेे जा रहा है। चुंकि, इस साल अधिक मास और कृष्ण पक्ष का सावन एक साथ आया है। मंगलवार 4 जुलाई कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से प्रारंभ हुआ पहला सावन 17 जुलाई तक रहेगा। यह कृष्ण पक्ष का सावन 15 दिन तक चलेगा। मंगलवार 18 जुलाई शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से प्रारंभ और गौरी पूजा-व्रत से पहला सावन रहेगा। अधिक माह का अंतिम दिवस बुधवार 16 अगस्त अमावस्या कृष्ण पक्ष को इसका समापन होगा। यह प्रथम सावन अत्यन्त महत्वपूर्ण होगा। दूसरे सावन का अंतिम दिवस आगामी माह के गुरुवार 31अगस्त पूर्णिमा शुक्ल पक्ष रक्षाबंधन पर्व पर समापन होगा। सनातन धर्म में वेद-पुराण अनुसार सावन का महीना एक विशेष महीना होता है जब भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से योग निद्रा में होते है। और भोलेनाथ जगत का संचालन करते हैं। लेकिन, इस वर्ष 19 साल बाद सावन मास में सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु-प्रिया लक्षष्मी नारायण और पाार्वती प्रिय पति महादेव दोनो की शक्तियाँ मिलकर संसार का उधार करेंगी।

अधिक सावन से उज्जैन में निकलेगी बाबा की 10 सवारी
सावन का महिना बाबा शिव की नगरी में बड़े धूमधाम से मनाया जाता हैं जब भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए निकलते हैं तो उनकी सवारी भव्य – सजावट और धूम के साथ निकाली जाती है। भक्त दूर-दूर से उनकी सवारी के दर्शन करने आते हैं।
बता दें कि, साल 1985 में भी जब 2 माह का सावन आया था तो महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महादेव की 10 सवारियां निकाली गई थी। ऐसा संयोग पूरे 19 साल बाद फिर से आया है। जब महादेव की नगरी उज्जैन में फिर से बाबा की 10 सवारियां निकाली जायेंगी। अधिक मास की 4, सावन की 4 और भादौं मास की 2 सवारियां निकाली जाएगी। 10 जुलाई को पहली सवारी की शुरुआत की जाएगी साथ ही 11 सितंबर को श्रध्दालुओं को अंतिम सवारी के दर्शन होंगे।

अधिक सावन में मनाई जाएगी दो शिवरात्रि
सावन मास शुरु होते ही कांवड़ यात्रा भी प्रारंभ हो चुकी है। शिव भक्त कांधे पर कांवड़ उठाये नंगे पांव हरिद्वार , गोमुख , गंगोत्री , काशी – विश्वनाथ , नीलकंठ , बैद्यनाथ देवघर जैसे अन्य शिव के पवित्र तीर्थ स्थानों की पैदल यात्रा करके गंगा जैसी पावन नदियों का पवित्र जल लाते हैं और भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं। इस साल 2 सावन होने की वजह से शिवरात्रि भी 2 मनाई जाएगी 15 जुलाई को पहली शिवरात्रि और 15 अगस्त को दूसरी शिवरात्रि मनाई जाएगी।
