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सेंथिलबालाजी की अस्पताल से मिली छुट्टी

चेन्नई : वी सेंथिलबालाजी को बायपास सर्जरी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी और उन्हें कड़ी सुरक्षा में पुझल सेंट्रल जेल भेजा गया है। मंत्री को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) ने 12 जून को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले ईडी ने उनके आधिकारिक आवास और आवास तथा राज्य सचिवालय में इनके चेंबर में पर 17 घंटे तक छापेमारी की। इसके बाद से इन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
पूछताछ के लिए कार में ईडी कार्यालय ले जाते समय मंत्री ने सीने में दर्द की शिकायत की थी और उन्हें ओमानदुरार के सरकारी मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ले जाया गया जहां एक एंजियोग्राम किया गया। इस जांच में इनके रक्त वाहिकाओं में तीन ब्लॉकेज होने का पता चला और डॉक्टरों ने जल्द से जल्द बाइपास सर्जरी कराये जाने की सलाह दी। इसके बाद मंत्री की पत्नी ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की और उन्हें गिरफ्तारी से पहले इलाज के लिए इनके पंसदीदा अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति अदालत ने दे दी। मंत्री को मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बाद शहर के कावेरी अस्पताल में भेज दिया गया ,जहां 21 जून को उनकी सर्जरी की गयी।
प्रधान सत्र न्यायाधीश सुश्री एस.अली ने इससे पहले उनकी गिरफ्तारी के बाद मंत्री की जमानत याचिका रद्द करते हुए 16 जून को ईडी को 08 दिन की हिरासत दे दी थी। अदालत ने श्री सेंथिलबालाजी ने पूछताछ करने और इसे प्रस्तुत करने का निर्देश दिया । उन्हें 23 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष पेश किया गया। मंत्री का क्योंकि इलाज अस्पताल में चल रहा था इसलिए ईडी न तो हिरासत में उनसे पूछताछ कर पायी और न ही हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद मंत्री को अदालत में पेश किया जा सका।
इस बीच मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की संस्तुति पर राज्यपाल आर एन रवि ने श्री सेंथिलबालाजी के विभाग थंगम थेन्नारासु और एस.मुथुसामी को दे दिये। मुख्यमंत्री नहीं चाहते थे कि आपराधिक मामले का सामना कर रहे श्री सेंथिलबालाजी को सरकार में पद पर बनाये रखा जाए। विपक्षी दल भी उन्हें मंत्रिमंडल से हटाये जाने की लगातार मांग कर रहे थे। हालांकि बाद में तमिलनाडु सरकार ने एक आदेश जारी उन्हें मंत्रिमंडल में बिना के किसी पोर्टफोलियो के मंत्री के रूप में बनाये रखा।
इस पर राज्यपाल ने प्राप्त शक्तियों के तहत श्री सेंथिलबालाजी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया लेकिन बाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जब उन्हें इस मामले में अटॉर्नी जनरल से सलाह लेने को कहा तो उन्होंने यह फैसला स्थगित कर दिया। इसके बाद सत्तारूढ़ द्रमुक और राजभवन के बीच जुबानी जंग छिड गयी।

दोनों ही पक्षों के बीच पहले से ही मतभेद काफी अधिक रहते थे। मुख्यमंत्री ने मंत्री को मंत्रिमंडल से हटाये जाने पर राज्यपाल से पूर्ण असहमति जताते हुए कहा कि राज्यपाल को ऐसी कोई शक्ति प्राप्त नहीं है कि वह यह फैसला करे कि मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में कौन मंत्री रहेगा और कौन नहीं। यह निर्णय मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है।

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