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लगातार टरबाइन चलने से नर्मदा का जलस्तर बढ़ा

बड़वानी : मध्यप्रदेश के बड़वानी खरगोन जिले से गुजरने वाली नर्मदा नदी में ओंकारेश्वर परियोजना की टरबाइन लगातार चालू रहने से जलस्तर बढ़ने के बावजूद डूब में आने वाले ग्रामों को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। यहां आज शाम सेल्फी लेने वाले कुछ लोगों को पुलिस ने हटाया।
एनवीडीए के कार्यपालन यंत्री एस एस चोंगड ने बताया कि ओंकारेश्वर परियोजना में लगातार टरबाइन चालू रहने के चलते इसके आगे खरगोन तथा बड़वानी जिलों में नर्मदा नदी के जलस्तर में पिछले सप्ताह से लगातार वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि बड़वानी जिले में फिलहाल किसी भी ग्राम में डूब का खतरा नहीं है।
उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर परियोजना से प्रतिदिन औसतन 5 टरबाइन के चलने से करीब 1000 क्यूमेक्स पानी डिस्चार्ज हो रहा है। इसके साथ ही गुजरात के केवड़िया कॉलोनी स्थित सरदार सरोवर परियोजना के गेट अभी नहीं खुले हैं और कैनाल हेड पावर हाउस ( सी एच पी एच) तथा रिवर बेड पावर हाउस( आरबीपीएच) से बहुत कम पानी छोड़ा जा रहा है। इसके चलते बैक वाटर भी नर्मदा का जलस्तर बढ़ाने में सहायक हो रहा है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बड़वानी के समीप राजघाट स्थित 1964 में निर्मित नर्मदा नदी के पुल को 2017 में जर्जर तथा अनुपयोगी मानते हुए आवागमन के लिए बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि इसे गिराए जाने के लिए ब्रिज कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को भी लिखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजघाट स्थित पुराने पुल के आंकड़ों के फिलहाल कोई मायने नहीं रह गए हैं क्योंकि बड़वानी से धार को जोड़ने वाला नया पुल कसरावद राजघाट में 149 मीटर ऊंचाई पर स्थापित है। यह पुराने पुल से करीब 22 मीटर से ऊंचा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 129 मीटर तक बड़वानी जिले के किसी भी ग्राम में डूब नहीं आएगी। उन्होंने बताया कि 127.500 मीटर पर नर्मदा नदी का राजघाट स्थित जर्जर व अनुपयोगी पुल डूब जाता है। आज शाम 6 बजे राजघाट पर 125.700 मीटर जलस्तर था।
कार्यपालन यंत्री ने कुकरा राजघाट पर अभी भी बने हुए 17 परिवारों को लेकर कहा कि 2002 में यहां रहने वाले समस्त परिवारों को जमीन खेत का मुआवजा देकर गुजरात में जमीन और खेत प्रदान कर दिए गए थे। इस दौरान जो लोग अवयस्क थे ,अब वयस्क हो गए हैं और वह भी मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात गए और राजघाट कुकरा में बने हुए समस्त लोग यहां अपने खेतों में वर्ष में 9 महीने खेती करते हैं। फिलहाल यहां बने हुए 17 परिवारों को 2019 में हटाकर टीन शेड में जगह प्रदान कर दी गई थी।
उन्होंने बताया कि इन परिवारों की कुछ जमीन रूप से बाहर होने की वजह से वे यहां बने रहते हैं और बारिश के मौसम में उक्त स्थान टापू जैसा बन जाता है। उधर, आज शाम पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग राजघाट के पुराने पुल पर सेल्फी ले रहे हैं। कोतवाली पुलिस ने वहां पर पहुंचकर लोगों को चेतावनी देते हुए हटाया।

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