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अयोध्या का हो रहा है सर्वांगीण विकास

अयोध्या : मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या धाम को विश्व स्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिलाधिकारी नितीश कुमार ने गुरुवार को बताया कि श्रीरामजन्मभूमि पर विराजमान रामलला का भव्य मंदिर निर्माण को देखते हुए अयोध्या धाम को विश्व स्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन नगरी के रूप में विकसित एवं स्थापित करने के दृष्टिगत अयोध्या धाम का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अयोध्या धाम को जोडऩे वालेे विभिन्न मार्गों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण करने के साथ ही अयोध्या व उसके आसपास विभिन्न पौराणिक एवं ऐतिहासिक कुंडों, मठ-मंदिरों, आश्रमों एवं पर्यटन स्थलों का विकास एवं निर्माण किया जा रहा है। अयोध्या जिले के 37 धार्मिक पर्यटन स्थलों के फसाड ट्रीटमेंट एवं पर्यटन अवस्थापना सुविधाओं के विकास निर्माण कार्य के लिये 68.80 करोड़ रूपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के साथ ही 34.55 करोड़ रूपये की प्रथम किस्त प्राप्त हो चुकी है।
जिलाधिकारी ने बताया कि अयोध्या में 37 धार्मिक स्थलों यथा-जानकी घाट, बड़ा स्थान, दशरथ भवन मंदिर, लक्ष्मण किला, मंगल भवन, अक्षरी मंदिर, राम कचेहरी मंदिर, ब्रम्ह कुण्ड गुरूद्वारा, रिर्षभ सरथ पनास मंदिर, सियाराम किला, दिगम्बर अखाड़ा, तुलसी चौराहा मंदिर, कौशल्या घाट मंदिर, भारत महल मंदिर, हनुमान मंदिर, कालेराम मंदिर, नेपाली मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर, छोटी देवकाली मंदिर, मायूर मंदिर, राम गुलेला मंदिर, करतलिया बाबा मंदिर, तिवारी मंदिर, वेद मंदिर, सिंघम मंदिर, गारापुर मंदिर, मणिराम दास छावनी मंदिर, बरेली मंदिर, रंग महल मंदिर, सीशराज महल मंदिर, मोतीहारी मंदिर, टेढ़ीयाती महादेव मंदिर, राम पुस्तकालय मंदिर, विद्या देवी मंदिर, देवीकाली कुण्ड मंदिर, सरोवर मंदिर तथा धन्यानाष्य कुण्ड मंदिर के बिल्डिंग एवं आर्ट संरक्षण कार्य के साथ ही पेंटिंग, लाइटिंग अरेस्ट्रो, फसाड ल्यूमिनेशन, विजिटर एमिनिटीज (टॉयलेट, क्लाक रूम, ड्रिंकिंग वाटर एण्ड शू रेक), स्ट्रीट फर्नीचर (स्ट्रीट लाइट, बेंचस, डस्टबिन, रेलिंग फुटपाथ), सीसीटीवी आदि कार्य कार्यदायी संस्था उप्र राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड द्वारा किया जायेगा।
उन्होंने बताया कार्यदायी संस्था को सभी स्थानों पर शीघ्र कार्य प्रारम्भ करने तथा आगणन की विशिष्टियों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण ढंग से समस्त कार्यो को दिसम्बर 2023 तक पूर्ण करने के निर्देश दिये गये हैं।

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