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इरशालवाड़ी: मरने वालों की संख्या 16 हुयी, कई लापता

मुंबई : महाराष्ट्र में रायगढ़ के इरशालवाड़ी भूस्खलन से मरने वालों की संख्या शुक्रवार सुबह 16 तक पहुंच गई और मलबे के नीचे 50 से अधिक लोगों के अभी भी दबे होने की आशंका है। इस बीच भारी बारिश के कारण रात में रोका गया बचाव एवं राहत अभियान आज सुबह फिर से शुरू हो गया है।
रायगढ़ जिले के इरशालवाड़ी की आदिवासी वाडी में बुधवार रात हुई भूस्खलन की दुखद घटना ने जिले के खालापुर तालुका में इरशालगढ़ की तलहटी में स्थित लगभग 35 से 40 घरों को भी पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक इस छोटे से गांव में 48 परिवारों के 229 आदिवासी रहते थे। उनमें से कुछ भागने में सफल रहे, लेकिन सैकड़ों आदिवासी भूस्खलन के नीचे फंस गए।
खालापुर पुलिस के मुताबिक बचाव दल के मौके पर पहुंचने पर मलबे से 103 लोगों को बचाया जा चुका था। नवी मुंबई फायर ब्रिगेड के एक जवान जो इस गांव को बचाने जा रहे थे, की कल दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपने चार कैबिनेट सहयोगियों के साथ कल पूरे दिन वहां डेरा डाले रहे और बचाव कार्यों की निगरानी करते रहे।
रायगढ़ जिले के खालापुर तालुका में पिछले तीन दिनों में 400 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इतनी भारी बारिश के बीच रात करीब दस बजे खालापुर तालुका के चौक के पास इरशालगढ़ की वाडी में दरार पड़ने से यह तहस-नहस हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि इरशालवाड़ी में लगभग 45 घरों में 229 निवासी रहते हैं। एक ग्रामीण ने कहा कि वाडी के अधिकांश निवासी सो गए थे, जबकि कुछ बच्चे पास के बंद स्कूल परिसर में सो रहे थे, जब यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी।
उन्होंने बताया कि गांव के पास स्कूल परिसर में सो रहे बच्चों ने आवाज सुनी और अपने माता-पिता की तलाश में भागने की कोशिश की। हंगामा सुनने के तुरंत बाद खोपोली में पीड़ितों के पास सबसे पहले यशवंती ट्रेकर्स के सदस्य गुरुनाथ साहिलकर पहुंचे और आधी रात के आसपास राहत कार्य शुरू किया। एक ग्रामीण ने बताया कि इसके बाद खोपोली, खालापुर, कर्जत से कई एंबुलेंस और सामाजिक कार्यकर्ता भी राहत कार्य के लिए पहुंच गए।

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