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प्राकृतिक कृषि ही प्रगति, उन्नति का मार्ग

गांधीनगर : गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मंगलवार को कहा कि प्राकृतिक कृषि ही प्रगति, समृद्धि, विकास और उन्नति का मार्ग है। देवव्रत ने आज बायसेग के माध्यम से राज्यभर के 3,50,000 से अधिक किसानों, शिक्षकों, गांव-गांव में प्रशिक्षण दे रहे किसान मास्टर ट्रेनरों, टेक्नीकल मास्टर ट्रेनरों और आत्मा-कृषि विभाग कर्मचारियों के साथ प्राकृतिक कृषि परिसंवाद किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए किसानों को भी आत्मनिर्भर बनना होगा। प्राकृतिक खेती आत्मनिर्भर खेती है। इसके लिए किसान को रासायनिक खाद या कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती। सारे संसाधन किसान के घर में ही उपलब्ध हैं। किसान और कृषि आत्मनिर्भर बनेंगे तो भारत आत्मनिर्भर बनेगा।
राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक कृषि ही प्रगति, समृद्धि, विकास और उन्नति का मार्ग है। रासायनिक खाद के अंधाधुंध प्रयोग के कारण किसान स्वयं भी धीमा जहर खा रहे हैं और समाज को भी धीमा जहर खिला रहे हैं। प्राकृतिक खेती जहरमुक्त खेती है। यदि ईमानदारी से प्राकृतिक खेती की जाए तो हमारा मिशन सफल होगा और भारत भूमि शस्यश्यामलाम् बनेगी। पर्यावरण भी बचेगा और भगवान का आशीर्वाद भी मिलेगा।
गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक, शिक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक कृषि से भी जुड़े हैं। राज्यपाल ने इनसे विशेष आग्रह करते हुए कहा कि शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रेरणा का स्रोत बनना चाहिए। जो शिक्षक खेती भी करते हैं उन्हें प्राकृतिक खेती के तरीके अपनाने चाहिए। शिक्षक समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर ऐसा होगा तो समाज के अन्य लोग भी शिक्षकों का अनुसरण कर प्राकृतिक खेती करने लग जाएंगे।
सजीव खेती, जिसे सेंद्रीय खेती, जैविक खेती, जैविक खेती जैसे विभिन्न नामों से पहचाने जाने वाली ऑर्गेनिक खेती सफल कृषि पद्धति नहीं है। इससे किसानों की उत्पादन लागत कम नहीं हुई है, मेहनत भी कम नहीं हुई है और ना ही आय में वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं, पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती और जैविक खेती करने के बाद, वह स्वयं आठ वर्षों से हरियाणा के कुरूक्षेत्र में अपने 200 एकड़ के खेत में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इसका लाभ भी सफलतापूर्वक उठा रहे हैं और उसके बाद ही अन्य लोगों को बता रहे हैं। यदि इससे मुझे लाभ नहीं हुआ होता तो वह दूसरों से इस मार्ग पर चलने का आग्रह क्यों करते? उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव सुनाकर किसानों-शिक्षकों को प्राकृतिक खेती के मूल सिद्धांत समझाये। उन्होंने कहा कि यदि हम प्राकृतिक खेती पद्धति को अपनाएंगे तो आने वाली पीढ़ी माता-पिता को आशीर्वाद देगी।
ज्यादा से ज्यादा किसान प्राकृतिक खेती पद्धति को अपनाएं, इसके लिए गुजरात सरकार गांव-गांव जाकर किसानों को उनके घर-द्वार पर निःशुल्क प्रशिक्षण देती है। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि वह इस खरीफ मौसम में प्राकृतिक खेती की विधि को भली-भांति समझकर अपनायें।
सेमीनार के आरंभ में ‘आत्मा’ के विशेष अधिकारी दिनेशभाई पटेल ने सभी का स्वागत किया। कृषि, किसान कल्याण एवं सहकारिता विभाग के अपर मुख्य सचिव एके. राकेश एवं संयुक्त सचिव पीडी. पलसाणा भी इस सेमीनार में शामिल हुए। अंत में ‘आत्मा’ के निदेशक पीएस. रबारी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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