जयपुर : अशोक गहलोत ने सोमवार को नवसृजित जिलों और तीन संभागों की शिला पट्टिकाओं का अनावरण कर प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात दी। गहलोत ने बिड़ला सभागार में हुए नवसृजित जिलों के स्थापना कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन में आहूति दी और राजस्थान के चहुंमुखी विकास के लिए कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देकर कहा कि नए जिलों और संभागों के सृजन से राज्य की प्रशासनिक इकाइयों का विकेन्द्रीकरण होगा, उनकी क्षमताएं बढ़ेगी और कानून व्यवस्था अधिक मजबूत होंगी। आमजन के प्रशासनिक कार्य अब नजदीक ही सुगमता से होंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए जनभावनाओं में घुली यह राजस्थान की एक नई सकारात्मक शुरूआत है। इससे प्रदेश को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। हमने राज्यहित में फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वर्ष 1956 में दो करोड़ की जनसंख्या पर 26 जिले बने थे वहीं 67 साल में आबादी तीन गुना बढ़ने के बावजूद सात ही नए जिलों का गठन हुआ था। अब राज्य सरकार ने जनभावना के सम्मान में प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण के लिए एक साथ 19 नए जिलों का गठन किया है। इसके पीछे हर एक प्रदेशवासी का सपना राजस्थान को वर्ष 2030 तक हर क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल कराना है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महात्मा गांधी के विचारों और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जिला गठन समिति का कार्यकाल छह माह बढ़ाया गया है, जिससे आमजन की न्यायोचित मांगों पर परीक्षण कर पूरा किया जाएगा।
गहलोत ने कहा कि जिस तरह पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने देश को खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, सूचना और रोजगार प्राप्त करने का अधिकार कानून बनाकर दिया। उसी तरह हमने भी स्वास्थ्य का अधिकार (आरटीएच), राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी, न्यूनतम 1000 रुपए सामाजिक सुरक्षा पेंशन का अधिकार राजस्थान के हर पात्र व्यक्ति को दिया है। इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी में 125 दिन रोजगार, महात्मा गांधी नरेगा के 125 दिन के रोजगार और अनिवार्य एफआईआर की गारंटी दी है। अब राजस्थान रेगिस्तान नहीं बल्कि गारंटी देने वाला प्रदेश बन गया है।
गहलोत ने नवसृजित जिलों का किया उद्घाटन
