कुशीनगर : उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढोत्तरी से तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बुधवार सुबह से नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी शुरू हो गई। शाम तक यह बढ़कर 2,15,100 क्यूसेक पर पहुंच गई। इससे गंडक नदी चेतावनी बिंदु के 24 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई। अभी जलस्तर में और वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।
यदि जलस्तर में बढ़ोतरी यूं ही जारी रही तो गंडक नदी के किनारे बसे सात गांवों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है।अधिकृत सूत्रों ने बताया कि सुबह आठ बजे वाल्मीकि गंडक बैराज से नदी में 1,52,900 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह दोपहर 12 बजे तक बढ़कर 1,55,600 क्यूसेक पर पहुंच गया। दोपहर दो बजे 1,66,600 क्यूसेक हो गया। इसमें वृद्धि लगातार जारी रही। नतीजतन शाम छह बजे गंडक नदी में पानी का बहाव बढ़कर 2,09,600 क्यूसेक और शाम सात बजे 2,15,100 क्यूसेक पर पहुंच गया। यह इस बरसात में अब तक का सर्वाधिक डिस्चार्ज है।
उन्होने बताया कि अभी भी इसमें बढ़ोतरी जारी है। इस वजह से खड्डा क्षेत्र के भैसहां गेज स्थल पर गंडक नदी का जलस्तर सुबह आठ बजे चेतावनी बिंदु को पार कर 20 सेंटीमीटर ऊपर 95.20 मीटर पर पहुंच गया। दोपहर 12 बजे 95.15 मीटर, 2 बजे 95.14 मीटर, शाम 4 बजे 95.18 मीटर और शाम 7 बजे 95.24 मीटर बढ़कर हो गया। इसमें बढ़ोतरी जारी है।
उल्लेखनीय है कि वाल्मीकि गंडक बैराज से छोड़े जाने वाली पानी को खड्डा क्षेत्र में पहुंचने में छह से सात घंटे का समय लगता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पानी का असर आधी रात्रि से दिखने लगेगा। जलस्तर बढ़ने से खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर सहित सालिकपुर और महदेवा गांव की लगभग 40 हजार से ज्यादा आबादी पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
