रांची : झारखंड के होम्योपैथिक चिकित्सकों की टीम ने होम्योपैथिक चिकित्सकों और होम्योपैथिक चिकित्सा विज्ञान में अध्ययनरत छात्र छात्राओं के लिए रांची के आई.एम.ए भवन में नि:शुल्क सेमिनार का आयोजन किया। मुंबई के प्रसिद्ध चिकित्सक और होम्योपैथिक चिकित्सा विज्ञान के वक्ता थ्री नाइस मैन के द्वारा आज वक्तव्य दिया गया। इनके द्वारा उपस्थित चिकित्सकों को बताया गया की कैसे मस्तिष्क के व्यवहार से बीमारी को पकड़ते है।
थ्री नाइस मैन के नाम से प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ योगेश राजुरकर, डॉ श्रीकृष्णा दाफले, डॉ आलोक कुमार की टीम ने होम्योपैथिक चिकित्सकों को बताया कि बीमारी को कैसे पकड़ना है। कौन सी बीमारी कब हुई है, क्या जिस समय बीमारी हुई है उस समय मरीज के साथ कोई घटना घटी है या मरीज को किसी कारणवश से कार्य करने में कोई दिक्कत हो रही है। बीमारी होने से मरीज के मस्तिष्क पर मानसिक रूप से क्या कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
मस्तिष्क के व्यवहार को देखते हुए रूब्रिक्स को देखते है की कौन सी दवा की रूब्रिक्स, मस्तिष्क व्यवहार से मरीज का व्यवहार मिल रहा है। उसके बाद दवा का चुनाव करते है और बहुत ही कम मात्रा में दवा की खुराक मरीज को दी जाती है जो ज्यादा असरदार होती है और मरीज को कोई भी दुष्प्रभाव नही पड़ता है।
होम्योपैथी में संभव है स्थायी इलाज
