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योग की भारतीय संस्कृति का हो अधिकाधिक प्रसार

जयपुर : राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने योग की भारतीय संस्कृति के अधिकाधिक प्रसार का आह्वान करते हुए कहा है कि भारतीय परम्परा में योग शारीरिक व्यायाम भर नहीं है बल्कि यह आंतरिक शांति और आत्म साक्षात्कार की जीवन यात्रा है।
मिश्र रविवार को नगर निगम ग्रेटर, जयपुर द्वारा बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित ’जयपुर योग महोत्सव 2023 सम्मान समारोह’ में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि योग आत्मविकास का सबसे बड़ा माध्यम है। यह हमें आदर्श जीवन शैली के जरिए स्वस्थ तन और स्वस्थ मन की ओर ले जाता है।
राज्यपाल ने कहा कि यदि मनुष्य योग को अपनाता है तो वह सकारात्मकता के भावों के साथ जीवन की उत्सवधर्मिता से जुड़ जाता है। योग के माध्यम से जीवन से जुड़ी जटिलताओं को आसानी से हल किया जा सकता है। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में योग को प्रोत्साहन देते हुए आधुनिक पीढ़ी को योगिक दिनचर्या से जोड़ने का आह्वान किया।
श्री मिश्र ने कहा कि स्वस्थ और सुखी जीवन के लिए भस्त्रिका, कपाल भाति, त्रिबंध, अनुलोम विलोम, भ्रामरी आदि योग का नियमित अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने योगाचार्यों से कहा कि आम जन को योग से जुड़े ऐसे आसान आसनों के बारे में अधिकाधिक बताएं, जिन्हें हर कोई कर सके। राज्यपाल ने ’हर आंगन योग, हर घर निरोग’ की मुहिम को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम ग्रेटर, जयपुर के इस आयोजन की सराहना की।
इस मौके सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की परम्परा शुरू की और योग को सशक्त वैश्विक पहचान मिली। नगर निगम ग्रेटर, जयपुर की महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने अपने संबोधन में 21 दिवसीय योग महोत्सव के अंतर्गत हुई गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। श्री मिश्र ने महापौर को तिरंगा सौंपकर निगम के हर घर तिरंगा अभियान का शुभारम्भ किया। उन्होंने वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी रामू सैनी का शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया।

उन्होंने समारोह में योग साधकों को योग विभूति सम्मान और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कार्यक्रम में जयपुर योग महोत्सव की स्मारिका नवोन्मेष का लोकार्पण किया। आरम्भ में राज्यपाल ने उपस्थित लोगों से संविधान की प्रस्तावना का वाचन कराया और मूल कर्त्तव्यों का पठन किया। कार्यक्रम में देशभक्तिपूर्ण सुमधुर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, मलखम्भ और योग कौशल की प्रस्तुतियां भी हुई।

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