भुवनेश्वर : निर्वासित तिब्बती संसद की सदस्य यूडॉन औकात्सांग ने कहा कि तिब्बत और भारत का संबंध सदैव मजबूत और गहरा रहा है, जो धर्म और भाषा से परे है। औकात्सांग ने बुधवार को भुवनेश्वर में शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधानन डीम्ड यूनिवर्सिटी (एसओए) के छात्रों के साथ बातचीत में कहा कि बौद्ध तिब्बतियों का धर्म है जिसकी जडें और भाषा भारत में हैं। ओडिशा के दौरे पर आयी सुश्री औकात्सांग और निर्वासित तिब्बती संसद के दो अन्य सदस्यों ने विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ बातचीत की और उन्होंने भारतीय तथा तिब्बती लोगों के संबंधों और उनके देश में वर्तमान स्थिति के बारे में बात की।
समूह के अन्य दो सदस्य वेन थारचिन और ताशी धोंडुप थे, जिन्होंने ‘भारत और तिब्बत- साझा विरासत और साझा भविष्य’ विषय पर बात की। वेन थारचिन और औकात्सांग ने कहा कि आध्यात्मिक नेता दलाई लामा सहित कई तिब्बती भारत आए और पिछले 64 वर्षों से यहां रह रहे हैं। औकातसांग ने कहा कि निर्वासित तिब्बती संसद हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में स्थित है और हम अपने देश की स्थिति के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। वेन थारचिन ने कहा कि तिब्बती लोग भारत में की सरकारों के आभारी हैं जिन्होंने उनका समर्थन किया और उनके धर्म और संस्कृति को यहां फलने-फूलने दिया। उन्होंने कहा कि दलाई लामा भारत में जीवंत लोकतंत्र से बहुत प्रभावित हैं।
