- ओपीडी में सुबह से शाम तक लग रही लंबी कतारें
- सटीक उपचार की प्रतीक्षा में मरीज पीट रहे माथा
- चिकित्सकों की मरीजों के साथ माथापच्ची
- अस्पताल में ढाई हजार से अधिक मरीजों का दैनिक पंजीकरण
- मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत मरीजों को नहीं मिल रही पूरी दवाइयां
- विभिन्न रोगों के लिए जेनेरिक दवाइयों की उपलब्धता पर चिकित्सकों ने दी प्रतिक्रिया
कपिल शर्मा | गौरवशाली भारत
कोटपूतली | दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित उप जिलास्तरीय करीब 250 बेड का राजकीय बीडीएम अस्पताल में लगातार बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मुफ्त जाँच एवं दवा की अपेक्षा के साथ आम व खास लोग सही उपचार की उम्मीद लिए दूर-सदूर गांव व कस्बों से पहुंच रहे हैं। शहर के प्रसिद्ध बीडीएम अस्पताल में विभिन्न बिमारियों के उपचार के लिए दैनिक मरीज़ों का आकड़ा लगभग ढाई हजार पंजीकरण बताया गया है। सुबह से शाम तक ओपीडी में लगी लंबी कतारों में खड़े मरीज़ चिकित्सकों द्वारा मिलने वाले उपचार की प्रतीक्षा करते हैं। चिकित्सकों के अनुपस्थिति में उन्हें निराशाजनक स्थिति से पुन: घर लौटने के लिए विवश होते हैं।

कई चिकित्सक द्वारा परामर्श और निदान के लिए पर्चे पर लिखी पूरी दवाइयां बूथ पर नहीं मिलने से मरीज़ों को बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए कहा जाता है। राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत मरीजों को पूरी जेनेरिक दवाइयां अस्पताल बूथ पर नहीं प्राप्त हो रही हैं। मिली जानकारी में बताया गया कि, अस्पताल की लैबोरेट्री में 60 से अधिक खुन से जुड़ी जाँच बताई गई हैं। फिलहाल, थायरॉइड की जाँच अस्पताल में उपलब्ध नहीं पाई गई।

अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों और ट्रीटमेंट को लेकर गौरवशाली भारत से ख़ास बातचीत के दौरान बीडीएम अस्पताल में प्रवर चिकित्सा अधिकारी डाॅ. सुमन यादव ने बताया कि, अस्पताल में जेनेरिक दवाइयां ही उपलब्ध हैं। सभी को अस्पताल से ही दवाई दी जा रही है। सामान्यतर- ज्यादातर बुखार के मरीज आ रहे हैं। वहीं डेंगू के मरीज़ में कमी आई है। विभिन्न रोगों में वायरल फीवर, आई फ्लू, जुकाम-खांसी, उल्टी-दस्त, टाइफाइड, मलेरिया, पीलिया व खून की कमी आदि रोगों की दवाईयां उपलब्ध हैं। जेनेरिक दवाइयां ही चिकित्सकों द्वारा लिखी जा रही हैं। यह दवाइयां सरकार की योजना में भी हैं और सभी इससे परिचित भी हैं। प्रवर चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि किसी भी मरीज़ को बाहर से दवाइयां खरीदन की जरूरत नहीं है। सभी जेनेरिक दवाईयां बूथ पर उपलब्ध करवाई गई हैं।

वहीं अस्पताल की ओपीडी के मेडिकल विभाग में मौजूद एमबीबीएस जनरल फिजिशियन डाॅ. नरेश कुमार छीपी ने गौरवशाली भारत संवाददाता से बातचीत में बताया कि अधिकांश मरीजों के निदान के लिए वह प्रतिबद्ध हैं। अस्पताल में मरीजों को जेनेरिक दवाइयों से काॅफ़ी लाभ मिलता है। डॉ. नरेश ने तीव्र ज्वर से पीड़ित मरीज़ गाँव भांखरी की मीना नाम की महिला को डायग्नोज करते हुए उन्हें झोला छाप चिकित्सकों से उपचार नहीं कराने की सलाह दी।
अस्पताल में दाखिल मरीज एवं ओपीडी में लंबी कतारों में खड़े पेशेंट प्रतिक्रियाओं में आशिंक मरीज पूरी दवाइयां और कुछ जांच नहीं पाए जाने पर निराशा जाहिर की। तो वहीं कुछ मरीजों ने अस्पताल की सुविधाओं से संतुष्टता व्यक्त की।
