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पन्नीरसेल्वम और तीन अन्य की याचिका खारिज

चेन्नई : मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अन्नाद्रमुक के अपदस्थ नेता ओ.पन्नीरसेल्वम और उनके तीन समर्थकों को झटका देते हुए उनकी ओर से दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीक की पीठ ने सामान्य परिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों को मान्य करने वाले उच्च न्यायालय की एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।

पन्नीरसेल्वम और उनके वफादार आर. वैथिलिंगम, पी.एच.मनोज पांडेन और जेसीडी प्रभाकर ने अन्ना द्रमुक मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) की 11 जुलाई 2022 की जनरल काउंसिल में लिए गए निर्णयों को चुनौती देते हुए ये याचिका दायर की गई थी। काउंसिल ने महासचिव के रूप में श्री पन्नीरसेल्वम और उनके वफादारों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
पीठ ने पाया कि अपीलकर्ताओं द्वारा प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है इसलिए उनकी अपीलें भी खारिज कर दी गईं है।
पिछले वर्ष हुई सामान्य परिषद की बैठक की वैधता पर पीठ ने कहा कि शीर्ष न्यायालय ने पहले ही इसकी अनुमति दे दी है, इसलिए बैठक की वैधता को रद्द करने के लिए कोई अंतरिम निषेधाज्ञा नहीं दी जा सकती है। पीठ ने महासचिव के रूप में श्री पलानीस्वामी के चुनाव में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और जनरल कौंसिल की बैठक में सर्वसम्मति से अपनाए गए एक विशेष प्रस्ताव के रूप में श्री पन्नीरसेल्वम और उनके तीन समर्थकों के निष्कासन में भी हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
पीठ ने अन्नाद्रमुक के चार अपदस्थ नेताओं द्वारा उनके सिविल मुकदमों में किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से न्यायमूर्ति के. कुमारेश बाबू के 28 मार्च के इनकार को चुनौती देने वाली सभी मूल पक्ष अपीलों को खारिज कर दिया। पीठ ने यह भी माना कि उसे चारों को पार्टी से निष्कासित करने वाले सामान्य परिषद में पारित विशेष प्रस्ताव के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का कोई कारण नहीं मिला। उच्च न्यायालय के आज के फैसले को पन्नीरसेल्वम के लिए झटका माना जा रहा है हालांकि उनके खेमे का कहना है कि उनके पास शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प खुला हैं।

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