मुरैना : मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में वन भूमि पर घर बनाकर रह रहे करीब आधा सैंकड़ा आदिवासी परिवारों को वन विभाग और पुलिस द्वारा बलपूर्वक उनके घरों को बुलडोजर से जमींदोज कर बेघर करने का मामला सामने आया है। वहीं वन विभाग का दावा है कि उन्होंने आदिवासी परिवारों को पहले भी वन भूमि को खाली करने को कहा था। मुरैना के अनुविभागीय दण्डाधिकारी भूपेंद्र सिंह कुशवाह ने यहां बताया कि बेघर हुए आदिवासी परिवार के लोग कल उनसे मिलने आये।
आदिवासियों ने आरोप लगाया कि जिले के नूराबाद थाना क्षेत्र के धनेला पंचायत के करहधाम का पूरा में वन भूमि पर करीब आधा सैंकड़ा आदिवासी परिवार अपने कच्चे पक्के घर बनाकर लंबे समय से रह रहे थे। कल वन विभाग के अमले ने पुलिस के साथ मिलकर उनके घरों को जेसीबी और बुलडोजर से गिराकर जमींदोज कर दिया। पीड़ित परिवारों ने अमले द्वारा उनके साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया। इसमें चार लोग घायल हुए हैं।
कुशवाह ने बताया कि वन विभाग ने ये कार्रवाई जिला प्रशासन को बगैर सूचना दिए की है। उन्होंने आदिवासी परिवारों को आश्वस्त किया कि प्रशासन उन्हें अन्यत्र बसाने के लिये शीघ्र जमीन उपलब्ध कराएगा। वहीं वन मण्डलाधिकारी स्वरूप रविन्द्र दीक्षित ने कहा कि आदिवासी परिवारों ने वन भूमि पर अतिक्रमण कर घर बना लिए थे। उन्हें दो बार कहा गया था कि वे इस जमीन से अतिक्रमण हटा लें, लेकिन जब उन्होंने अतिक्रमण नहीं हटाया तब विभाग ने पुलिस की मदद से कल उस भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है।
