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ट्रेन में आग लगने के मामले में पांच गिरफ्तार

चेन्नई : तमिलनाडु के मदुरै में शनिवार को एलपीजी विस्फोट के बाद ट्रेन में आग लगने की घटना के सिलसिले में उत्तर प्रदेश से पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना में नौ लोगों की मौत हुयी थी और आठ घायल हुए थे। तमिलनाडु सरकारी रेलवे पुलिस ने इन लोगों को सोमवार को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 164 का उल्लंघन करते हुए ट्रेन में ज्वलनशील वस्तुएं ले जाने और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 (2) (गैर इरादतन हत्या) सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में जी. सत्यप्रकाश रस्तोगी, आर. नरेंद्रकुमार, एम. हार्दिक साहनी, जे. दीपक और सी. सुभम कश्यप शामिल हैं। ये सभी उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के मूल निवासी हैं इन सभई को मदुरै में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया, जहां से इन्हें 11 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने कहा, “गिरफ्तार किए गए सभी लोग टूर ऑपरेटर, मेसर्स भसीन ट्रैवल्स सीतापुर के सहायक कर्मचारी हैं, जिन्होंने निजी पार्टी कोच बुक किया था। इसने 17 अगस्त को 16824 अनंतपुरी एक्सप्रेस से लखनऊ से अपनी यात्रा शुरू की थी और रविवार को ट्रेन से चेन्नई लौटने वाली थी और उसके बाद इसे वहीं से लखनऊ लौटना था।
दक्षिण रेलवे के सूत्रों ने कहा कि निजी पार्टी कोच शनिवार सुबह 3.47 बजे ट्रेन नंबर 16730 (पुनालूर-मदुरै एक्सप्रेस) से मदुरै आया। इस ट्रेन में कोच को मदुरै से करीब 240 किलोमीटर पहले नागरकोइल रेलवे स्टेशन पर जोड़ा गया था। सूत्रों के मुताबिक ट्रेन से अलग होकर मदुरै रेलवे स्टेशन से लगभग एक किमी दूर यार्ड में खड़े होने के बाद कोच में आग लग गई थी। आग लगने के समय उक्त कोच उस लाइन में अकेला कोच था और किसी अन्य कोच/संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ। ट्रैवल एजेंट मेसर्स भसीन ट्रैवल्स ने आईआरसीटीसी के माध्यम से इस निजी पार्टी कोच को ऑनलाइन बुक किया था और इ्न्हें गैस सिलेंडर जैसी किसी भी ज्वलनशील सामग्री को ले जाने या उपयोग करने की अनुमति नहीं दी गई थी। ट्रेवल एजेंसी ने बताया था कि कोच का उपयोग केवल परिवहन उद्देश्यों के लिए किया जाना है। इस सिलसिले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 (2) के तहत मामलोा दर्ज करने के अलावा इन लोगों के खिलाफ आग या दहनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाही बरतने के लिए आईपीसी की धारा 285 के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।

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