गांधीनगर : आचार्य देवव्रत ने शुक्रवार को कहा कि प्राकृतिक कृषि ही प्रगति का सच्चा मार्ग है, किसान पूर्ण विश्वास के साथ प्राकृतिक कृषि करें। देवव्रत के साथ गोष्ठि करने के लिए कच्छ के मुन्द्रा- मांडवी क्षेत्र में प्राकृतिक कृषि करने वाले किसान आज यहां राजभवन आए। श्री राजशक्ति प्राकृतिक खेती सहकारी मंडली के 225 सदस्यों में से इन किसानों ने अपने प्राकृतिक खेती के अनुभव साझा किए। राज्यपाल ने प्रत्येक किसान को व्यक्तिगत मार्गदर्शन देते हुए कहा कि प्राकृतिक कृषि ही प्रगति का सही मार्ग है इसलिए किसान पूर्ण विश्वास के साथ प्राकृतिक खेती करें।
मुन्द्रा-मांडवी के विधायक अनिरुद्ध भाई दवे के नेतृत्व में राजभवन आए किसानों ने उत्साहपूर्वक अपने अनुभव साझा किए। इतना ही नहीं वह उनके द्वारा उत्पादित प्राकृतिक कृषि उत्पाद भी साथ लेकर आए। फल, सब्जियां और गुणवत्ता राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत करते हुए किसानों का आनन्द देखते ही बनता था। इस क्षेत्र में प्राकृतिक कृषि का दायरा बढ़ाने के लिए प्रयत्नशील अदाणी फाउंडेशन की पंक्तिबेन शाह भी किसानों के साथ उपस्थित थीं।
कच्छ जिले के मुन्द्रा क्षेत्र में प्राकृतिक कृषि करने वाले किसान जीवराज भाई गढवी ने गुजरात के किसान प्राकृतिक खेती ही करें, इस संकल्प को साकार करने के लिए जूते नहीं पहनने का प्रण लिया है। श्री आचार्य देवव्रत ने उनके इस संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि यह संकल्प जल्दी से जल्दी पूर्ण हो जाए, इसके लिए सामूहिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
श्री जीवराज भाई गढवी ने इस अवसर पर कहा कि वह पिछले सात वर्ष से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उनकी जमीन का ऑर्गेनिक कार्बन 0.3 प्रतिशत था जो आज बढ़कर 2.00 फीसदी हो गया है। प्राकृतिक खेती से वह इतने स्वादिष्ट और पौष्टिक बाजरे का उत्पादन करते हैं कि उनका बाजरा 300 रुपए किलो बिकता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने के लिए अपना परम्परागत पहनावा ही अपना लिया है। प्राकृतिक खेती से वह इतने सुखी हुए हैं कि अपने खेत में एग्रो टूरिज्म विकसित करने का आयोजन कर रहे हैं। वह कच्छ में किसानों को भी प्राकृतिक खेती की तालिम दे रहे हैं।
प्राकृतिक खेती से कमलम् फल की फसल उत्पादित करने वाली महिला किसान गीताबेन जेठवा ने कहा कि वह प्रतिवर्ष ढाई से तीन लाख तक का कमलम् फल उत्पादित करके भुज और राजकोट में बेचती हैं। राज्यपाल ने उनको घनजीवामृत बनाने की सही विधि समझायी और वैज्ञानिक पद्धति से प्राकृतिक खेती करने का मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बीजों को बीजामृत से संस्कारित करके बुवाई करने, घनजीवामृत बनाने, आच्छादन करने और एक साथ अनेक फसलें लेने की पद्धतियां सिलसिलेवार समझायीं।
महिला किसान ज्योतिबेन टांक उनके खेत से करेले लेकर आयी थी। राज्यपाल करेले का साइज और गुणवत्ता देखकर काफी प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसान अपने उत्पादों का स्वयं ही मूल्य तय करके योग्य मार्केटिंग करें, तो आय में निश्चित तौर पर बढ़ोतरी होगी।
रामजीभाई गढवी अपने बगीचे का जंगबारी नारियल लाये थे। विशाल आकार का नारियल देखकर राज्यपाल आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के प्रति भरोसा पैदा कीजिये, बिक्री के लिए मार्केट तो अपने आप खड़ा हो जाएगा। भुजपुर के सरपंच माणेकभाई गढवी, मावजी भाई वगैरह किसानों ने भी उनके अनुभव बताए और प्राकृतिक कृषि से समृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। श्री आचार्य देवव्रत ने अन्य सभी किसानों से भी प्राकृतिक कृषि अपनाने की प्रेरणा और मार्गदर्शन देने का सभी किसानों से अनुरोध किया।
प्राकृतिक कृषि ही प्रगति का सच्चा मार्ग है
