- भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी, अर्धरात्रि बुधवार, कारागृह में कंस के, भयो कृष्ण अवतार
- अकाल मृत्यु, गर्भपात, वैधव्य, और दुर्भाग्य, कलह तथा गर्भधारण में संतान सुख वंचित करें बाल गोपाल की विशेष पूजा
- देश मना रहा है कृष्ण का 5250वाँ जन्मोत्सव
- मन्दिरों उमड़ा आस्था का सैलाब
- व्यापक स्तर पर की गई तैयारियाँ
कपिल शर्मा | गौरवशाली भारत
कंस नगरी मथुरा बृजभूमि के कारावास में देवकी के गर्भ से आठवें पुत्र स्वरुप जन्में कृष्ण जिनके पिता वासुदेव और पालनकर्ता माता यशोदा और नंदबाबा के घर गोकुल में अपना बचपन बिताने वाले कृष्ण कन्हैया के आज जन्मदिवस उपलक्ष्य दुनियाभर में जश्न और बधाई का खुशनुमा माहौल देखा जा सकता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी तिथि को रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि में हुआ था। इस साल अधिक महिना (पुरूषोत्तम माह) दो श्रावन माह के चलते कृष्ण जन्माष्टमी गुरुवार 7 सितंबर को मनाई जा रही है। हालांकि, देश के कई हिस्सों में बुधवार को भी जन्माष्टमी पर्व मनाया गया।

देश मना रहा है कृष्ण का 5250वाँ जन्मोत्सव इस बार भगवान श्रीकृष्ण का 5250वां जन्मोत्सव बताया गया है। यानी ब्रज के लाडले कृष्ण कन्हाई इस बार 5249 वर्ष के हो गए हैं। भगवान कृष्ण के 5250वें वर्ष में प्रवेश करने पर जन्मोत्सव की तैयारियां व्यापक स्तर पर की गई हैं। ब्रज भूमि सज संवर रही है। हर चौक-चौराहों और मन्दिर केे आँगन को सजाया गया है। कन्हैया के जन्म के दर्शन को श्रीकृष्ण जन्मस्थान बृजभूमि पर आने वाले भक्तों के लिए व्यापक व्यवस्थाएं भी की गई हैं। कारागृह में क्यों जन्में कृष्ण यह एक गोपनीय रहस्य है। कंस की कुकर्मों से थर्राती प्रथ्वी ने क्षीरसागर में शयन करने वाले भगवान विष्णु से गुहार लगाई। जब भगवान विष्णु ने उन्हें आश्वासन दिया उनका जन्म मथुरा नरेश कंस के महल और मथुरा नगरी में होगा। जब कंस बहन के गर्भ से आठवें पुत्र स्वरूप उनका कृष्ण बाल अवतार होगा होगा।

उल्लेखनीय है कि, द्वापर युग में मथुरा पुरी में भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मध्य रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था। सागर पंचांग, श्री ब्रजभूमि पंचांग, श्रीराधा गोविंद पंचांग सहित अन्य पचांगों के आधार पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म को 5249 वर्ष पूर्ण बताया गया है। जानकारों का कहना है कि, 5250वें वर्ष में इस बार गुरुवार 7 सितंबर को भगवान कृष्ण प्रवेश करेंगे। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विक्रम संवत 2080 पंचांगों में कलियुग की आयु 5123 वर्ष की लिखी है। उसमें 126 वर्ष पूर्व भगवान का जन्म हुआ था, इसलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस बार 5249 वर्ष के भगवान गोविंद को हो जाएंगे। देश मना रहा है कृष्ण का 5250वाँ जन्मोत्सव इस वर्ष कन्हैया के 5250वें जन्मोत्सव को भव्यरूप से मनाने के लिए ब्रज में उत्साह का वातावरण है। हर तरफ तैयारियों का दौर चल रहा है। कन्हैया की नगरी को सजाया संवारा जा रहा है। खासकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि को तो और भी भव्यता प्रदान की जा रही है। कन्हैया के जन्मोत्सव के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से मथुरा आ रहे भक्तों को प्रसाद की व्यवस्था में ब्रजवासी जुटे हैं। नगर निगम से भंडारा लगाने की अनुमति मांगी जा रही हैं। लोगों में अद्भुत उत्साह बना हुआ है। कैसे करें कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा जन्माष्ठमी के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके व्रत का संकल्प लें। माता देवकी और भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति या चित्र पालने में स्थापित करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा आदि देवताओं के नाम जपें। रात्रि में 12 बजे के बाद श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं। पंचामृत से अभिषेक कराकर भगवान को नए वस्त्र अर्पित करें एवं लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं। पंचामृत में तुलसी डालकर माखन-मिश्री व धनिये की पंजीरी का भोग लगाएं तत्पश्चात आरती करके प्रसाद को भक्तजनों में वितरित करें। कृष्ण जन्म अष्टमी तिथि का महत्व धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु जी ने धर्म की स्थापना के लिए श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था। इस दिन व्रत धारण कर श्रीकृष्ण का स्मरण करना अत्यंत फलदाई होता है। शास्त्रों में जन्माष्ठमी के व्रत को व्रतराज कहा गया है। भविष्य पुराण में इस व्रत के सन्दर्भ में उल्लेख है कि, जिस घर में यह देवकी-व्रत किया जाता है वहां अकाल मृत्यु, गर्भपात, वैधव्य, दुर्भाग्य तथा कलह नहीं होती। जो एक बार भी इस व्रत को करता है वह संसार के सभी सुखों को भोगकर विष्णुलोक में निवास करता है साथ ही जो महिला गर्भ से वंचित है अथवा गर्भधारण में संतान सुख वंचित है या पुत्र की कामना रखती है वह इस जन्माष्टमी का उपवास विधिपूर्वक करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। संंतान सुुख के लिए भगवान बाल गोपाल संतान स्त्रोत का पाठ करने का महत्व बताया गया है। कौन से युग में अवतार लिया भगवान कृष्ण सनातन हिन्दू धर्म में श्रीकृष्ण विष्णु के 8वें अवतार माने गए हैं। यह सौलह कलाओं से परिपूर्ण माने जाते हैं। कन्हैया, श्याम, गोपाल, केशव, द्वारकेश या द्वारकाधीश, वासुदेव आदि नामों से भी कृष्ण को जाना जाता है। कृष्ण निष्काम, कर्मयोगी, आदर्श दार्शनिक, स्थितप्रज्ञ एवं दैवी संपदाओं से सुसज्जित महान पुरुष थे। उनका जन्म द्वापरयुग में हुआ था। उनको इस युग के सर्वश्रेष्ठ पुरुष, युगपुरुष या युगावतार का स्थान दिया गया है। कृष्ण के समकालीन महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत और महाभारत में कृष्ण का चरित्र विस्तृत रूप से लिखा गया है। भगवद्गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद है। जिसमें अठारह अध्याय 700 श्लोक हैं। यह ग्रंथ आज भी पूरे विश्व में लोकप्रिय है। इस उपदेश के लिए कृष्ण को जगतगुरु का सम्मान भी दिया जाता है। श्रीमद्भागवत पुराण में है संपूर्ण कृष्ण रहस्य सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे! तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम: !! श्रीमदभागवत पुराण के प्रथम अध्याय का प्रथम श्लोक सच्चिदानंद स्वरूप भगवान् श्री कृष्ण को हम नमस्कार करते हैं , जो इस जगत की उत्पत्ति , स्थिति और विनाश के हेतु तथा आध्यात्मिक , आधिदैविक और आधिभौतिक – तीनों प्रकार के तापों का नाश करनें वाले हैं। श्रीकृष्ण की महिमा अपरम्पार है इन्हें समझना जैसे सागर में मोती खोजने के समान है।
