नई दिल्ली : राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने लीवर (यकृत) और कैंसर की नकली दवाओं के प्रसार की रिपोर्टों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव तथा भारत के औषधि महानियंत्रक को नोटिस जारी किया है। एनएचआरसी के बयान में कहा गया है कि आयोग ने इस मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और इसमें जीवन रक्षक दवा के नकली संस्करणों की आपूर्ति एवं निकास की जांच करने के लिए प्रासंगिक कानूनों के कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति शामिल होनी चाहिए, जैसा कि समाचार रिपोर्ट में बताया गया है।
नोटिस की प्रतिक्रिया चार सप्ताह के भीतर मिलने की उम्मीद है। बयान में कहा गया है कि भारत सहित चार देशों में कथित तौर पर दवाओं के नकली संस्करण पाए गए हैं जो अक्सर रोगी की बहुत के अंदर होते हैं तथा अनियमित आपूर्ति श्रृंखलाओं (मुख्य रूप से ऑनलाइन) में वितरित होते हैं। आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया जिसमें कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अलर्ट के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने राज्य नियामकों, डॉक्टरों और मरीजों को दो दवाओं – लीवर तथा कैंसर की दवाओं – के बारे में सतर्क रहने को कहा है।
इसमें कहा गया है कि इन दवाओं के नकली संस्करण भारत सहित चार देशों में प्रसारित हो रहे हैं। गत 11 सितंबर को जारी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्पाद के पास भारत और तुर्की में विपणन का अधिकार नहीं है। भारत और तुर्की में लीवर दवा के नकली संस्करणों का पता चला था जिनकी आपूर्ति विनियमित और अधिकृत चैनलों के बाहर की गई थी।
