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सनातन का मतलब हिंदू नहीं, सभी धर्मों को मिटा रहे उदयनिधि

  • सनातन विरोधियों को जनता देगी जवाब
  • विपक्ष का साझा बयान है सनातन धर्म की मलेरिया से की गयी तुलना
  • लोकसभा चुनाव में खुद मिट जाएंगे सनातन मिटाने वाले

स्वाती सिंह

पहली बात यह कि सनातन का मतलब हिंदू धर्म नहीं है। यह उन अर्थों में हिंदू से जुड़ा है, क्योंकि यह सनातनी अर्थात सबसे पुराना है। सनातन धर्म उस समय से है जब कोई संगठित धर्म अस्तित्व में नहीं था। मानव सभ्यता धीरे-धीरे पशुवत से आगे बढ़ रही थी, सोच विकसित हो रही थी। इस कारण अब इसे जिंदगी के कुछ कायदे कानुन भी बनने शुरू हुए और उस नियमावली के तहत जीने का तरीका बनना शुरू हो गया। कुछ प्रकृति पर भरोसा किया जाने लगा। प्रकृति पूजन भी शुरू हो गया। इस पुरातन धर्म को ही सनातन कहा गया। चूकि हिंदू धर्म ही विश्व का सबसे पुराना धर्म है। जो भी पुरातन है, वह सनातन है और पुरातन हिंदू है, इस अर्थ में सनातन भी हिंदू धर्म से जोड़ दिया गया। वरना वृहद रूप में देखें तो हर धर्म हिंदू धर्म से ही निकला है अर्थात सनातन का अर्थ तो सर्वधर्म है। सभी धर्मों की जड़े ही सनातन हैं। यदि कोई भी, किसी भी धर्म का व्यक्ति सनातन का विरोध करता है तो वह अपने पूर्वजों का विरोध करता है।
जिसका कभी अंत नहीं हो सकता, वही सनातन है। दूसरे सभी उसी सनातनी जड़ से निकले पंथ हैं, जहां पर एक फिक्स नियमावली है। उसका पालन करना अनिवार्य है, लेकिन सनातन ही ऐसा धर्म हैं, जहां पर समयानुसार बदलाव संभव है और समय-समय पर बदलाव होते भी रहे हैं। वैदिककाल का ही देखिए पहले एकेश्वरवाद था, फिर बहुदेववाद आया। सनातन धर्म ही ऐसा है, जहां कण-कण में भगवान को देखता है। पूरे जीव जगत का पूजन करता है और आज कुछ लोग सनातन को ही मिटाकर अपनी राजनीति को चमका रहे हैं। यह निश्चय है कि जो सनातन को मिटाने चला है, उसकी पीढ़ियां खप गयीं और खप जाएगी, लेकिन सनातन नहीं मिटने वाला नहीं है।
यह भी तथ्यगत है कि हिंदू धर्म ही ऐसा धर्म है, जहां पर कोई भी टिप्पणी कर देता है और वह निकल जाता है, वरना दूसरी जगहों पर गर्दन काटने का भी फरमान जारी हो जाता है। यह भी बता दूं कि अब सनातन जग गया है, अपने धर्म के प्रति, अपने कर्म के प्रति, अपनी सहिष्णुता के प्रति। यहां हर सनातनी विधर्मियों को अपनी गांधीवादी नीति से जवाब देगा। उदयनिधि स्टालिन का मौन समर्थन करने वाले सभी विपक्षियों की मंशा भी जनता समझ चुकी है। यह तो निश्चय है कि इंडी गठबंधन का भी दो सितम्बर को उदयनिधि के दिये गये बयान में समर्थन है, वरना वह अब तक गठबंधन से अलग कर देता।
यह बता दूं कि उदयनिधि द्वारा दो सितम्बर को चेन्नई में सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी। साथ इसे खत्म करने को कहा था। उन्होंने कहा, “कुछ चीजें हैं, जिन्हें हमें खत्म करना है और हम सिर्फ विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू, कोरोना और मलेरिया ऐसी चीजें हैं, जिनका हम विरोध नहीं कर सकते। हमें उन्हें खत्म करना है। सनातनम (सनातन धर्म) भी ऐसा ही है। सनातन का विरोध नहीं, बल्कि उन्मूलन करना हमारा पहला काम है।
हिंदू धर्म ही एक ऐसा धर्म है, जहां सबसे ज्यादा लचीलापन है और हम जानते हैं कि लचीला कभी टूट नहीं सकता। यही कारण है कि हिंदू धर्म को तोड़ने वाले इस दुनिया से टूट गये, लेकिन यह धर्म आज भी अपना झंडा बुलंद कर रहा है। स्टालिन को यह समझना चाहिए कि वे हिंदू बाहुल्य राष्ट्र में इसके खत्म करने की बात कर रहे हैं, लेकिन यह धर्म आज उस देश में अपना झंडा बुलंद कर रहा है, जहां के अंग्रेज आकर यहां इसे कुचलने का प्रयास किये थे। वहां पर जाकर आज ऋषि सुनक प्रधानमंत्री होते हुए भी अपने को हिंदू धर्मावलंबी बताना नहीं भूलते। भारत में आकर अपने व्यस्त समय में भी अक्षरधाम जाकर मत्था टेकना नहीं भूलते।
भारत के लिए तो सनातन का अर्थ ही राष्ट्रवाद है। उस राष्ट्रवाद का झंडा आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उठाए हुए हैं। राष्ट्र विरोधियों को जवाब हर कदम पर जनता दे रही है और यही स्थिति रही तो आगे भी देती रहेगी। 2014 में भी जब गुजरात से निकलकर नरेंद्र मोदी पूरे राष्ट्र का नेतृत्व करने आये तो विरोधियों ने एकजुट होकर विरोध करने की कोशिश की, लेकिन विरोधियों के विरोध को देखकर जनता ने समझ लिया कि यह ठगों का, परिवारवादियों का, राष्ट्रविरोधियों का, भ्रष्टाचारियों का गठबंधन है, जो एक राष्ट्रवादी का विरोध करने पर उतारू है। इस कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि जनता ने वह चुनाव लड़ा और पूरे भारत में पूर्ण बहुमत से सरकार बनायी। दूसरी बार भी विरोधियों के विरोध के बावजूद जनता ने नरेंद्र मोदी को ही प्रधानसेवक के रूप में चुना, क्योंकि भारत उन्हीं के नेतृत्व सुरक्षित है।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पूरे विश्व का गुरू बनने के लिए अगली पंक्ति में खड़ा है। हर विश्व का नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोहा मानता है, ऐसे में विपक्ष बौखला गया है। उसे भारत से प्रेम नहीं है, उसको कुर्सी चाहिए। यही कारण है कि एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए घमंडिया गठबंधन द्वारा ही उदयनिधि को इस तरह के वक्तव्य का इशारा किया गया होगा। इसके साथ ही कांग्रेस ने उनका निजी बयान बताकर खुद से अलग कर लिया।
असल में राजीव गांधी के बाद कांग्रेस हिंदू धर्म का सबसे बड़ी विरोधी पार्टी है। यह वही पार्टी है, जो सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा देकर बताई थी कि राम काल्पनिक हैं और रामसेतु का कोई अस्तित्व नहीं। यह वही पार्टी है, जिसके नेता आतंकवादियों की सुप्रीम कोर्ट में परेवी करते हैं। इसके साथ खड़े समाजवादी पार्टी के बारे हर बच्चा जानता है, जिसने कार सेवकों पर गोलियां चलवाई थीं, जिसमें सैकड़ों की संख्या में कार सेवक शहीद हो गये।
(लेखिका- पूर्व मंत्री, भाजपा नेता हैं।)

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