नई दिल्ली : आयकर विभाग ने आज कहा कि आयकर रिटर्न (आईटीआर) की प्रोसेसिंग और रिफंड तेजी से जारी करने के लिए हर संभव प्रयास किये जा हरे हैं लेकिन कुछ ऐसे मामले हैं जिनमें करदाता पर पिछली मांगे बकाया होने के कारण उनका रिफंड बकाया है।
विभाग ने आज यहां कहा कि आंकलन वर्ष 2023-24 के लिए 7.09 करोड़ रिटर्न दाखिल किए गए हैं। इनमें से 6.96 करोड़ आईटीआर सत्यापित किए जा चुके हैं, जिनमें से 6.46 करोड़ रिटर्न अब तक संसाधित किए जा चुके हैं, जिनमें 2.75 करोड़ रिफंड रिटर्न भी शामिल हैं। तेजी से प्रसंस्करण और रिफंड शीघ्र जारी करने पर जोर दिया गया है।
उसने कहा कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 245(1), मौजूदा मांग के विरुद्ध रिफंड को समायोजित करने से पहले करदाता को प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान करना अनिवार्य है। करदाता को मांग की स्थिति से सहमत, असहमत या स्पष्ट करना आवश्यक है। इसके परिणाम स्वरूप पिछले वर्षों में मौजूदा मांग वाले करदाताओं को इसकी सूचना दी जा रही है।
विभाग ने कहा कि यह एक करदाता अनुकूल उपाय है जहां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप अवसर प्रदान किया जा रहा है। करदाताओं से अनुरोध है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और ऐसी सूचनाओं का जवाब दें ताकि लंबित मांगों की सफाई/समाधान हो सके और समय पर रिफंड जारी करने की सुविधा मिल सके।
आयकर रिटर्न की प्रोसेसिंग और रिफंड तेजी से जारी करने के प्रयास जारी
