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दिव्यांगों के उत्थान के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर काम करना होगा : धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा, कौशल एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दिव्यांगों के उत्थान के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर काम करना होगा। जिसकी नजीर लोक सेवक मंडल ने पेश की है। मैं एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक एवं अनुसंधान परिषद) से कहूंगा कि कोई भी शैक्षिक योजना बनाने से पहले अब लोक सेवक मंडल, अनाम स्नेह परिवार जैसी तमाम उन संस्थाओं से सुझाव जरूर ले जो विकलांगों के बीच निस्वार्थ भाव से काम कर रही हैं।
वह सोमवार को लोक सेवक मंडल और अनाम स्नेह परिवार के तत्वावधान में लाजपत भवन के सभागार में आयोजित दिव्यांग स्वाभिमान सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह ईश्वर प्रदत्त है कि अगर कोई किसी व्यक्ति के शरीर के किसी अंग में कोई कमी आती है तो उसे पांच अन्य विधाएं अधिक मिल जाती है। जरूरत है उन पांच विधाओं पर फोकस किया जाएं न कि उसके शरीर के किसी अंग विशेष की अक्षमता पर। इसका उदाहरण यहां लोक सेवक मंडल द्वारा संचालित बलवंत राय मेहता अंगूरी देवी विद्या निकेतन की मूक बधिर बच्चियों को राजस्थानी लोक नृत्य रहा। ईश्वर ने इन्हें अतिरिक्त विधा प्रदान की है। उन्हीं पांच अतिरिक्त विधाओं को देखते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांगों को दिव्यांग की संज्ञा दी।
उड़ीसा के नेत्रहीन आदिवासी कवि भीमा ने सैकड़ों साल पहले वसुधैव कुटुंबकम को परिभाषित करते हुए लिखा कि पूरी दुनिया हमारा परिवार है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार से प्रयागराज में ये दोनों संस्थाएं विकलांगों के लिए काम कर रही हैं उससे सभी को सीख लेनी चाहिए। वहां कोई दिव्यांग अगर भीख मांगता दिख जाता है इन संस्थाओं के कार्यकर्ता उसे लेकर जाते हैं और उसे काम करने को कहते हैं। शायद इसी का नतीजा है कि प्रयागराज में कोई भी दिव्यांग भीख मांगता नहीं दिखता।
इसके पूर्व मुख्य अतिथि का स्वागत लोक सेवक मंडल के सचिव डॉ. प्रवास आचार्य ने किया। प्रोफेसर अवनीस मिश्र ने कार्यक्रम के उद्देश्य बताए। पूर्व आईएएस एवं दिव्यांगों के लिए कार्य करने वाले दिल्ली एनसीटी के पूर्व आयुक्त टीडी धारियाल ने विस्तार से दिव्यांगों की समस्याओं और उनके समाधान भी सुझाए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लोक सेवक मंडल के अध्यक्ष राजकुमार चोपड़ा ने गांधी जी अंत्योदय की सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी कहते थे कि समाज के अंतिम व्यक्ति जो सबसे गरीब है उसका भी विकास हो।
मेरा मानना है कि सबसे गरीब दिव्यांग है उनको भी मुख्य धारा में जोड़ना होगा। समारोह में दिव्यांगों के उत्थान के लिए काम करने वाली 22 विभूतियों को मुख्य अतिथि ने अंगवस्त्रम् और प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया।

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