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चीनी फंडिंग के आरोपों से घिरी वेबसाइटों की जांच हो

नई दिल्ली : नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) {एनयूजेआई} ने चीनी फंडिंग के आरोपों से घिरी एक वेबसाइट और उससे जुड़े लोगों पर छापे को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से संबद्ध एनयूजेआई का मानना है कि चीनी फंडिंग के सहारे देश में चीनी दुष्प्रचार को बढ़ावा देना एक गंभीर मामला है। पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया है। संगठन ने मांग की है कि दिल्ली पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां सभी तथ्यों का पूरी सच्चाई के साथ खुलासा करें।
उल्लेखनीय है कि है पांच अगस्त को न्यूयॉर्क टाइम्स ने खुलासा किया था कि न्यूजक्लिक को एक अमेरिकी अरबपति नोवेल रॉय सिंघम ने फंड दिया है। सिंघम भारत समेत कई देशों में चीनी एजेंडा फैलाता है। प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से बताया गया है कि तीन साल में 38.05 करोड़ रुपए के फेक विदेशी फंड लिया गया है। यह धन गौतम नवलखा और तीस्ता सीतलवाड़ के सहयोगियों और कुछ पत्रकारों को दिया गया।
न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के आधार पर 17 अगस्त को न्यूजक्लिक के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। पूछताछ के लिए हिरासत लिए गए लोगों के खिलाफ आईपीसी  की धारा 153 (ए) (धर्म, जाति के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के साथ-साथ यूएपीए की कई धाराएं (13, 16, 17, 18 और 22) भी लगाई गईं।

धारा 16- आंतकी मामलों से जुड़ी, धारा 17- आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग जुटाना, धारा 18- षड्यंत्र की सजा, धारा 22 सी- कंपनियों द्वारा किए गए अपराध की सजा है। इससे पहले एक पत्रकार को चीन के लिए जासूसी करने के आरोप सजा भी हुई है। एनयूजेआई का मानना है कि इतने गंभीर आरोपों की निष्पक्षता से जांच आवश्यक है। दिल्ली पुलिस की तरफ से न्यूजक्लिक के खिलाफ पहले से ही मामला दर्ज किया गया है।

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