नई दिल्ली : भारतीय कृषि माइक्रोन्यूट्रिएंट बाजार 2022 में 57.16 करोड़ डॉलर का था जिसके वर्ष 2029 तक बढ़कर 105.76 करोड़ डॉलर होने का अनुमान है। इंटरनेशनल जिंक एसोसिएशन (आईजेडए) ने फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के सहयोग से आज यहां आयोजित ग्लोबल माइक्रोन्यूट्रिएंट शिखर सम्मेलन के दूसरे संस्करण में विशेषज्ञों ने यह अनुमान व्यक्त किया। इस सम्मेलन का आईजेडए के अध्यक्ष और हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने शुभारंभ किया।
फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक अरविंद चौधरी और रियो टिंटो के कंट्री हेड इंडिया विक्रम मर्चेंट, विशेष अतिथि थे। मिट्टी, फसलों और मानव स्वास्थ्य में माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी के महत्वपूर्ण मुद्दे को संबोधित करने के लिए अन्य प्रमुख विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के साथ ही भारतीय डाक के दिल्ली सर्कल की चीफ पोस्टमास्टर जनरल मंजू कुमार, केपीएमजी इन इंडिया, हैदराबाद के पार्टनर कुचिभोटला श्रीनिवासय और इंटरनेशनल जिंक एसोसिएशन के निदेशक साउथ एशिया (जेडएनआई) डॉ. सौमित्रा दास उपस्थित थे।
इसमें देश विदेश के 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इस दौरान विशेषज्ञोें ने हाल में जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुये कहा कि भारतीय कृषि माइक्रोन्यूट्रिएंट बाजार 2022 में 57.16 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2029 तक 105.76 करोड़ डॉलर होने का अनुमान है, जो 9.19 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ेगा। हाल ही में, भारतीय उपभोक्ताओं की प्राथमिकताएं स्वास्थ्यप्रद भोजन विकल्पों की ओर बढ़ी हैं जो स्वास्थ्य को बनाए रखने और सुधारने में सहायता कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप पोषक तत्वों से भरपूर फलों और सब्जियों जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की मांग में वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय कृषि उद्योग में सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ गई है।
इस मौके पर श्री दास ने कहा कि सर्वोत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में भारत की यात्रा हमारे आहार, स्वास्थ्य देखभाल और कृषि प्रथाओं में सूक्ष्म पोषक तत्वों के व्यापक एकीकरण पर निर्भर करती है। सूक्ष्म पोषक तत्व हमारे शरीर की मूलभूत प्रक्रियाओं की आधारशिला के रूप में काम करते हैं, समग्र जीवन शक्ति का पोषण करते हैं। ग्लोबल माइक्रोन्यूट्रिएंट शिखर सम्मेलन के माध्यम से, हम अपने दैनिक जीवन में, अपने भीतर और अपने कृषि प्रयासों दोनों में चरम प्रदर्शन के लिए उत्प्रेरक के रूप में माइक्रोन्यूट्रिएंट की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करने का प्रयास करते हैं। यह व्यक्तियों के लिए अपने शरीर के पोषण, दीर्घायु सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य प्रतिकूलताओं के खिलाफ मजबूती सुनिश्चित करने के गहरे प्रभाव को स्वीकार करना अनिवार्य है। वैश्विक स्तर पर, एक मजबूत, स्वस्थ और लचीली आबादी को बढ़ावा देने के लिए कृषि में माइक्रोन्यूट्रिएंट की अपरिहार्यता को पहचानना सर्वोपरि है।
एफएआई के निदेशक श्री चौधरी ने कहा कि कृषि की जटिल प्रक्रिया में, माइक्रोन्यूट्रिएंट अज्ञात नायक हैं, जो विकास और प्रचुरता के जीवंत नृत्य को बढ़ावा देते हैं। ग्लोबल माइक्रोन्यूट्रिएंट समिट के साथ, हम माइक्रोन्यूट्रिएंट-समृद्ध उर्वरकों के उपयोग के बारे में जागरूकता पैदा करना चाहते हैं। वे मौलिक आधार हैं, जो हर बीज के भीतर की क्षमता को खोलते हैं, और बंजर खेतों को समृद्ध परिदृश्य में बदलते हैं। इन सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर फॉर्मूलेशन को अपनाना सिर्फ एक विकल्प नहीं है, यह सतत कृषि के वादे में एक निवेश है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक पोषित भविष्य सुरक्षित करेगा।
भारतीय माइक्रोन्यूट्रिएंट बाजार होगा 105 करोड़ डॉलर का
