पिथौरागढ/नैनीताल : उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में कैलाश मानसरोवर मार्ग पर चट्टान के नीचे दबे लोगों के शवों को आखिरकार चौबीस घंटे के बाद निकाल लिया गया है। इसके साथ ही तवाघाट-लिपूलेख मार्ग भी आवाजाही के लिए खुल गया है। इनमें से छह की शिनाख्त हो गयी है। एक शव की पहचान नहीं हो पायी है। इनमें एक ही परिवार की तीन अबोध बच्चों के अलावा एक अधेड़ पति-पत्नी भी शामिल हैं।
जिला प्रशासन की ओर से आज पौ फटते ही फिर राहत व बचाव कार्य संचालित किया गया। मौके पर दो जेसीबी के साथ ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, एसएसबी और फायर बिग्रेड के जवान राहत व बचाव कार्य में जुटे रहे। चिकित्सा विभाग की टीम को भी मौके पर तैनात किया गया था। काफी मेहनत और मशक्कत के बाद चट्टान और बड़े-बड़े पत्थरों को तोड़कर हटाया गया। इसके बाद वाहन से शवों को निकालने का काम शुरू हो पाया। भारी पत्थरों के चलते वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था और शव इसमें फंस गये थे।
जिला आपदा प्रबंधन केन्द्र से मिली जानकारी के अनुसार सात लोगों की मौत हो गयी है। जिन लोगों की पहचान हो पायी है उनमें कोपिला (13), कशिश (10), नितिन (5) निवासीगण नपल्च्यू, तुलाराम (62) एवं आशा देवी (55) निवासीगण बूंदी और वाहन चालक किशन (34) निवासी बलुवाकोट शामिल हैं। एक शव की पहचान अभी नहीं हो पायी है। बताया जा रहा है कि मृतक नेपाल का रहने वाला है। कोपिला, कशिश और नितिन सगे भाई बहन हैं। नपल्च्यू निवासी बिदन सिंह के तीन बच्चे इस हादसे के शिकार हो गये जबकि मृतकों में बूंदी गांव निवासी तुलाराम और आशा देवी पति पत्नी हैं।
चिकित्सा विभाग की टीम ने शवों का मौके पर ही पोस्टमार्टम किया। इस दौरान मौके पर भीड़ जमा रही। इस घटना के बाद पूरे कुमाऊं में मातम पसरा हुआ है। दूसरी ओर धारचूला और उच्च हिमालयी क्षेत्र के लोगों और विभिन्न संगठनों में सीमा सड़क संगठन और निजी कंपनी को लेकर भारी रोष है। लोगों को आरोप है कि निजी कंपनी की ओर से किये गये बेहिसाब विस्फोट से पहाड़ खोखले हो गये हैं और बिना बरसात दरक रहे हैं।
आज धारचूला के व्यापारियों की ओर से धारचूला के उप जिलाधिकारी को इस मामले में ज्ञापन सौंपा गया। गौरतलब है कि कल दोपहर में गूंजी से आ रहे एक यात्री वाहन पर तवाघाट-लिपूलेख मार्ग पर कोथला के पास भारी भरकम चट्टान गिर गयी। वाहन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। जिला प्रशासन की ओर से तत्काल मौके पर राहत व बचाव कार्य चलाया गया लेकिन रात तक लोगों को निकाला नहीं जा सका था। सुरक्षा के लिहाज से रात को राहत व बचाव कार्य रोक दिया गया था।
चट्टान के नीचे दबे सात शवों को निकाला
