हो सकते हैं सीबीआई जांच के निर्देश
नैनीताल : उत्तराखंड के बहुचर्चित उद्यान घोटाले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से करायी जा सकती है। इस मामले में बुधवार को सुनवाई पूरी हो गयी है। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने सीबीआई जांच के संकेत देते हुए इस प्रकरण में निर्णय सुरक्षित रख लिया है। हल्द्वानी निवासी दीपक करगेती की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की युगलपीठ में सुनवाई हुई। अदालत ने विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) की ओर से पेश जांच रिपोर्ट का आज परीक्षण किया।
अदालत जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नजर नहीं आयी। इस प्रकरण में आज मैराथन सुनवाई हुई। लगभग पौने दो घंटे चली सुनवाई में अदालत ने जांच रिपोर्ट पर कई सवाल उठाये। अदालत ने कहा कि सरकार इस मामले में आंख मूंद कर बैठी रही लेकिन जब मामला उच्च न्यायालय में आया और सीबीआई जांच की मांग होने लगी तो सरकार हरकत में आयी और उसने मामला एसआईटी को सौंप दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि करोड़ों रूपये के कथित उद्यान घोटाले में सत्ताधारी दल का एक विधायक और उसका भाई भी शामिल है। याचिकाकर्ता की ओर से नैनीताल जनपद का उदाहरण देते हुए कहा गया कि उद्यान विभाग में फलदार पौधों के नाम पर गड़बड़ी पायी गयी है। दूसरी ओर महाधिक्ता एसएन बाबुलकर ने अदालत में पेश हुए और उन्होंने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार इस मामले में गंभीर है और जांच रिपोर्ट में आये तथ्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।
अंत में अदालत ने मामले की सीबीआई जांच के संकेत देते हुए इस प्रकरण में निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत सुनवाई के दौरान यह भी टिप्पणी की कि एसआईटी का दायरा और अधिकार सीमित हैं जबकि सीबीआई और एनआईए अपने अधिकार के बल पर दूसरे राज्यों में भी जांचकर दूध का दूध और पानी का पानी कर देती है।
