हमीरपुर : उत्तर प्रदेश सरकार ने बुन्देलखंड की सैकड़ो साल पुरानी चंदेलकालीन 62 धरोहरों को संरक्षित कर पर्यटन स्थल बनानेे का फैसला किया है। इसके लिये स्थानीय लोगो का सहयोग लेने के लिये स्मारक मित्र बनाये जायेंगे, ताकि स्थानीय लोगों की इन धरोहरों को विकसित करने में पूरा सहयोग मिल सके। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा मनोज कुमार यादव ने शुक्रवार को बताया कि पुरातत्व विभाग ने बुन्देलखंड के हमीरपुर ,महोबा, झांसी,जालौन,ललितपुर पांच जिलों में पुरानी धरोहरोंं को विकसित करने का फैसला किया है।
श्री यादव ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार की मंशा है कि धरोहरों का संरक्षण पीपीपी माडल के अनुसार कराया जाये क्षेत्रीय लोगो की सहभागिता कर धरोहरों को अधिक संरक्षित व विकसित किया जा सकता है। इसके लिये 19 नवम्बर से लेकर 25 नवम्बर तक विश्व धरोहर सप्ताह मनाया जायेगा। जिसमे बुन्देलखंड के लोगों को धरोहरों के बारे में जागरुक किया जायेगा।
उनका मानना है कि इन धरोहरों को विकसित कर पर्यटन स्थल बनाया जायेगा ताकि लोग पुरानी इमारतों को देखकर अपने बुजुर्गों की काविलियत व निष्ठा से सीख ले सके।
धरोहरों के निकट योग केंद्र व अच्छे प्रतिष्ठान खोले जायेंगे ताकि विदेश से बुन्देलखंड आने वाले लोग बुन्देलों के शौर्य गाथा के बारे में जान सके और हमारे बुजुर्गों को भूले नही। विदेशी पर्यटक बुदेली धरोहरों के बारे में जानने व देखने के लिये हमेशा उत्सुक रहते है। श्री यादव ने कहा कि सरकार बुन्देली धरोहरों के संरक्षण को लेकर बहुत ही गंभीर है क्योकि यहा का इतिहास बहुत पुराना है। उन्होने बताया कि बुंदेलखंड में मिट्टी के जो टीले है उनकी भी जांच की जायेगी। ताकि कुछ रहसस्यमयी वस्तुएं वहां से प्राप्त की जा सके।
