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केबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद हाईकोर्ट शिफ्टिंग का अधिवक्ताओं ने किया विरोध

नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय को हल्द्वानी शिफ्ट करने को लेकर केबिनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही इसका विरोध शुरू हो गया है। हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने गुरुवार को इसके विरोध में पुष्कर सिंह धामी सरकार का पुतला फूंका। इससे पहले अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट बार सभागार में एक बैठक की और सभी ने हाईकोर्ट की शिफ्टिंग का जोरदार विरोध किया। अधिवक्ताओं ने कहा कि राज्य को 22 साल बीतने के बाद भी पहाड़ी राज्य को स्थायी राजधानी नहीं मिल पायी है।
अब नैनीताल में बने स्थायी उच्च न्यायालय को भी तराई में ले जाये जाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए सरकार की ओर से अधिवक्ताओं को विश्वास में नहीं लिया गया है। जिसका अधिवक्ता पुरजोर विरोध करते हैं।
अधिवक्ता डीएस मेहता ने कहा कि सरकार का यह निर्णय पलायन को बढ़ावा देगा। अभी तक पहाड़ से 30 लाख लोग पलायन कर चुके हैं और 1000 गाँव बंजर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार पलायन रोकने को लेकर आयोग बना रही है वहीं दूसरी ओर सरकार लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर कर रही है।
अधिवक्ता व पूर्व सांसद महेंद्र सिंह पाल ने कहा कि हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं। राज्य आंदोलनकारी व अधिवक्ता रमन कुमार साह ने कहा कि राज्य सरकार के इस निर्णय को कानूनी तौर पर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे । राज्य सरकार जितना पैसा उच्च न्यायालय को शिफ्ट करने में लगा रही है अगर उसका कुछ हिस्सा यहाँ सुविधाओं के विकास में लगाती तो बेहतर होता।
अधिवक्ता डीके जोशी व योगेश पचोलिया ने कहा कि यह जनता के धन का दुरुपयोग है। हालांकि अधिवक्ताओं के एक बड़े वर्ग ने विरोध से दूरी बनाए रखी। अंत में अधिवक्ताओं की ओर से राष्ट्रपति व भारत के प्रधान न्यायाधीश को हाईकोर्ट शिफ्टिंग के विरोध में ज्ञापन भी भेजा गया।

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