श्रीनगर : केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान (स्किम्स) के डॉ. परवेज कौल ने शनिवार को कहा कि वायु प्रदूषण के कारण राज्य में प्रत्येक वर्ष करीब 10 हजार लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन चैप्टर के लॉन्च के मौके पर डॉ कौल ने कहा कि इसकी वजह पीएम 2.5 है और इसे नियंत्रित करना अपरिहार्य है। उन्होंने कहा, “आज इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच जागरूकता पैदा करना था कि वायु प्रदूषण का मुद्दा न केवल दिल्ली और महाराष्ट्र में बल्कि जम्मू-कश्मीर में भी वाहनों, निर्माण, ईंट भट्टों, सीमेंट कारखानों की बढ़ती संख्या के कारण हो रहा है , जो प्रदूषकों का उत्सर्जन करते हैं और हमारी वायु को काफी प्रदूषित करते हैं। यह हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण को लोगों के स्वास्थ्य के लिए दिन-प्रतिदिन समस्या बनाता जा रहा है।”
डॉ कौल ने कहा कि हमारा उद्देश्य उद्देश्य डॉक्टरों को इससे जागरूक करना है और यह संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि लोग डॉक्टरों की सलाह को भगवान की तरह मानते है। वास्तव में धरती पर डॉक्टर लोगों के लिए भगवान की तरह। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को यह जानकारी मिलेगी कि वायु प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है तो वे इसमें अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण शरीर के हर एक अंग को प्रभावित कर रहा है और प्रदूषण को कम करने के लिए हमारे पास कई तरीके हैं। उन्होंने कहा, “कश्मीर में वायु गुणवत्ता सूचकांक धीरे-धीरे खराब श्रेणी में पहुंच रहा है। खासकर सर्दियों के दौरान और पिछले कुछ दिनों में वायु गुणवत्ता सूचकांक मध्यम से गंभीर श्रेणी में पहुंचा गया है और अब हमें इस पर रोक लगाने की जरुरत है। अन्यथा लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।”
उन्हाेंने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इसी तरह की पहल करने की सख्त जरुरत है। वॉकिंग ट्रैक का निर्माण भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के एक हिस्से के रूप में एक अच्छी पहल है और वायु प्रदूषण को धीरे-धीरे नियंत्रित करने के लिए और छोटे बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।
वायु प्रदूषण से प्रत्येक वर्ष 10 हजार लोगों की मौत
