कुशीनगर : उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में दिवाली की रात लोगों ने जमकर पटाखे छोड़े, जिससे कुशीनगर की हवा खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो गई है। जिले में दिवाली के बाद के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 350 अंक तक पहुंच गया। जानकारों की मानें तो एक्यूआई का स्तर 50 अंक से अधिक होने पर खतरे की सीमा शुरू हो जाती है। दिवाली की रात शहर से लेकर देहात तक जमकर आतिशबाजी हुई।
जिसकी वजह से एक्यूआई के ग्राफ में जबरदस्त उछाल आया। आपदा विशेषज्ञ रवि राय ने बताया कि दीपावली के पहले शनिवार एवं रविवार की दोपहर करीब ढाई बजे कुशीनगर जिले का एक्यूआई 300 था। सोमवार को दीपावली के दिन करीब साढ़े तीन बजे जिले का एक्यूआई 350 और मंगलवार को दिन में करीब तीन बजे कुशीनगर जिले का एक्यूआई साढ़े तीन सौ से अधिक दर्ज किया गया है।
हवा में प्रदूषण का बढ़ना लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। हवा प्रदूषित होने से सभी तरह के बीमार लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। इस संबंध में प्रविका हास्पिटल के डा प्रणव राव ने बताया कि हवा में किसी भी तरह का प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। पटाखों से निकला धुआं अन्य धुएं से भारी होता है। जिससे सांस और हृदय के रोगियों को अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका होती है।
स्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ विकास गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने से सबसे अधिक परेशानी सांस के मरीजों को होती है, क्योंकि सांस लेने पर हवा का प्रदूषण स्वांस नली से सीधे फेफड़े में जाकर हृदय को क्षति पहुंचाता है। ऐसे में स्वांस रोगियों को बिना मास्क पहने घर से नहीं निकलना चाहिए। इसके अलावा पहले से चल रही दवाओं का नियमित सेवन करना चाहिए। डाक्टर सिद्धार्थ पांडे ने कहा कि हवा प्रदूषित होने से बच्चों को अधिक परेशानी होती है।
क्योंकि बच्चों का हृदय व फेफड़े नाजुक होते हैं। पटाखों से निकली धुआं उन्हें अधिक नुकसान पहुंचा सकता हैं। इससे बचाव के लिए बच्चों को बेवजह घर से न निकलनें दें। यदि जरूरी हो तो मॉस्क लगाकर घर से बाहर निकलें।
