कैपिटल बनाने में खर्च हुए 25,000 करोड़; 2014 में हुई घोषणा, पर जगन ने काम रोका
हैदराबाद। बीते 2 जून से आंध्र प्रदेश बिना आधिकारिक पूर्ण राजधानी के ही काम रहा है, लेकिन 12 जून से राज्य को पहली आधिकारिक राजधानी मिल जाएगी। हैदराबाद से करीब 510 किमी दूर बसी अमरावती ही आंध्र की नई राजधानी होगी।
यहीं तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) चीफ चंद्रबाबू नायडू चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसे राजधानी बनाने में अब तक करीब 25 हजार करोड़ खर्च हो चुके हैं।
2034 तक कुल एक लाख करोड़ खर्च होने हैं। टीडीपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता ज्योत्सना के मुताबिक इसी कार्यक्रम के साथ अमरावती राजधानी के रूप में काम करने लगेगी।
ज्योत्सना के मुताबिक अमरावती में शपथ के पीछे यही मैसेज देना चाहते हैं कि अब से सरकार अमरावती से ही चलेगी। सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों, विधायक, एमएलसी के घर बनाए जाएंगे।
अमरावती को आधिकारिक राजधानी बनाने की घोषणा चंद्रबाबू नायडू की सरकार के दौरान 2014 में ही हो गई थी, लेकिन 2019 में जगन के सीएम बनने के बाद यहां काम रोक दिया गया था।
दरअसल, 2014 से अब तक हैदराबाद तेलंगाना और आंध्र की संयुक्त राजधानी थी, लेकिन 2 जून को समय सीमा खत्म होने के बाद हैदराबाद तेलंगाना की राजधानी हो गई।
वैसे केंद्र सरकार 2014 में ही अमरावती को आंध्र की पूर्ण राजधानी का दर्जा दे चुकी है, लेकिन यहां सचिवालय, हाई कोर्ट, विधानसभा नहीं थी, इसलिए हैदराबाद से ही काम चल रहा था।
12 जून से अमरावती आंध्र की आधिकारिक राजधानी होगी
