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बागवानी फसलों का रकबा बढ़ा, पैदावार घटी

नई दिल्ली : वर्ष 2023-24 में आम, केला, नींबू, अंगूर, सेब और अन्य फलों की पैदावार 2.29 प्रतिशत बढ़कर 11 करोड़ 27 लाख 30 हजार टन होने की उम्मीद है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को यहां विभिन्न बागवानी फसलों के क्षेत्रफल और पैदावार का 2023-24 का तीसरा अग्रिम अनुमान जारी किया। आंकड़ों के अनुसारमीठा संतरा, अमरूद, लीची, अनार, अनानास की पैदावार वर्ष 2022-23 की तुलना में घटने का अनुमान है।
मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों तथा अन्य सरकारी एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर विभिन्न बागवानी फसलों के क्षेत्रफल और पैदावार का वर्ष 2023-24 का तीसरा अग्रिम अनुमान जारी किया है। वर्ष 2023-24 में प्याज की पैदावार 242.44 लाख टन होने की उम्मीद है।
देश में आलू की पैदावार वर्ष 2023-24 में लगभग 570.49 लाख टन होने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण बिहार और पश्चिम बंगाल में पैदावार में कमी होना है।
टमाटर की पैदावार में 213.20 लाख टन होने की उम्मीद है, जो पिछले साल लगभग 204.25 लाख टन थी यानी पैदावार में 4.38 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।
वर्ष 2022-23 में कुल बागवानी रकबा दो करोड़ 84 लाख 40 हजार हेक्टेयर रहा था जो ताजा अनुमान के मुताबिक 2023-24 में दो करोड़ 89 लाख 80 हजार हेक्टेयर हो गया है।
आंकड़ों के अनुसार देश में वर्ष 2023-24 में बागवानी फसलों की पैदावार लगभग 35 करोड़ 31लाख 90 हजार टन होने का अनुमान है, जो वर्ष 2022-23 की तुलना में लगभग 22.94 लाख टन कम है।
वर्ष 2023-24 में हालांकि फलों, शहद, फूलों, बागानी फसलों, मसालों और सुगंधित एवं औषधीय पौधों के उत्पादन में वृद्धि देखी गई है। इसी अवधि में सब्जियों की पैदावार लगभग 20 करोड़ 58 लाख टन होने की संभावना जताई गई है। टमाटर, पत्तागोभी, फूलगोभी, टैपिओका, लौकी, कद्दू, गाजर, ककड़ी, करेला, परवल और भिंडी की पैदावार में वृद्धि की उम्मीद है, जबकि आलू, प्याज, बैंगन, जिमीकंद, शिमला मिर्च तथा अन्य सब्जियों की पैदावार में उत्पादन में कमी का अनुमान है।

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