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आशा वर्कर्स ने निकाला रोष मार्च

सिरसा : हरियाणा में सिरसा स्थित लघु सचिवालय में आशा वर्कर्स की हड़ताल अनवरत 18 वें दिन भी जारी रही। शुक्रवार को धरनारत आशा वर्कर्स ने उपायुक्त कार्यालय से लेकर बस स्टैंड तक रोष मार्च निकालते हुए अपने रोष का इजहार किया। आशा वर्कर रोष मार्च के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल व उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के खिलाफ नारेबाजी भी कर रही थीं। आशा वर्कर्स ने चेतावनी भी दी कि रोष मार्च व धरना के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए जिला प्रशासन व राज्य सरकार जिम्मेदार होगी
इससे पहले लघु सचिवालय में धरने की अध्यक्षता करते हुए आशा वर्कर यूनियन की नेता दर्शना व कलावती माखोसरानी ने बताया कि सरकार ने आशा वर्कर्स का मानदेय वर्ष 2018 के बाद से नहीं बढ़ाया है,जबकि उनका काम पांच गुना बढ़ा दिया गया है। वेतन न बढ़ाने व काम के अधिक बोझ के कारण आशा वर्कर को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार की इस बेरूखी के कारण आशा वर्कर्स में भारी रोष है।

यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार बार-बार कहती है कि हड़ताल से आम जनता को कोई नुकसान नहीं हो रहा है, बल्कि जब से आशा वर्कर हड़ताल पर आई हैं, उसके बाद होम डिलीवरी व शिशु मृत्यु जैसे केसों की संख्या लगातार बढ़ रही है,जोकि चिंता का विषय है। उनकी मांग है कि आशा वर्कर्स को न्यूनतम वेतन 26 हजार रूपए दिया जाए। आशा वर्कर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्रदान करते हुए व रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष की जाए।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा बार-बार की जा रही वायदा खिलाफी के विरोध में स्टेट कमेटी ने निर्णय लिया है कि 29 अगस्त तक आशा वर्कर्स की हड़ताल जारी रहेगी। इसके अलावा 28 अगस्त को पंचकु ला विधानसभा क्षेत्र का घेराव भी किया जाएगा। अगर इसके बावजूद भी सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो हड़ताल को आगे बढ़ाया जाएगा।
इस दौरान जो भी जनहित में नुकसान होगा,उसके जिम्मेदार सरकार व विभागीय अधिकारी होंगे। इस मौके पर उषा, परवीन, पिंकी, मीनाक्षी, गीता, सुमन, रेखा, रोशनी सहित जिलेभर की सैंकड़ों आशा वर्कर ने रोष मार्च में भाग लिया। मंच का संचालन शिमला व सुलोचना ने किया।

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