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ईसाइयों पर हमले, उच्चतम न्यायालय ने आठ राज्यों से सत्यापित रिपोर्ट मांगी

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने ईसाई समुदाय पर हमले के आरोप लगाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह आरोपों के संबंध में कर्नाटक सहित आठ राज्यों से सत्यापन रिपोर्ट मांगे और शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने याचिकाकर्ता नेशनल सॉलिडेरिटी फोरम के डॉ पीटर मचाडो, इवेंजेलिकल फेलोशिप ऑफ इंडिया के विजयेश लाल और अन्य याचिका पर सुनवाई के बाद गृह मंत्रालय को केंद्रीय को यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने देश में ईसाई समुदाय के लोगों के खिलाफ कथित हिंसा को रोकने के लिए शीर्ष अदालत से आवश्यक निर्देश देने की गुहार लगाई थी।
पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा, “हम याचिका में लगाए गए आरोपों की सत्यता पर एक राय नहीं बना सकते हैं। यह सत्यापित करना बेहतर होगा।” शीर्ष अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने, गिरफ्तारियां करने, जांच की स्थिति और दायर आरोपपत्र सहित पूरी कवायद के लिए गृह मंत्रालय को दो महीने का समय दिया। पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से बिहार, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओड़िसा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से जानकारी मांगने को कहा है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने दावा किया कि हिंसक तरीके से ईसाइयों की 700 प्रार्थना सभाओं को रोक दिया गया।
श्री गोंजाल्विस ने भीड़ की हिंसा से संबंधित तहसीन पूनावाला फैसले (2018) को लागू करने के लिए निर्देश देने की भी गुहार लगाई। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने केंद्र सरकार की और से कहा कि गृह मंत्रालय ने सत्यापन करने पर पाया कि सांप्रदायिक हमलों के रूप में संदर्भित कई घटनाएं या तो झूठी या बढ़ा चढ़ा कर पेश की गई थीं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले महीने अदालत को बताया था कि जनहित याचिका, झूठ और आधे-अधूरे दस्तावेजों और प्रेस रिपोर्टों पर आधारित थीं। केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना था कि इसके पीछे पूरे देश में अशांति पैदा करना और शायद विदेशों से ‘धन की मांग करना’ था।

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