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बोस को जनता की पीड़ा जाननी चाहिए

कोलकाता : अभिषेक बनर्जी ने कहा कि राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस को बंगाल की जनता की पीड़ा जाननी चाहिए। बनर्जी ने कहा, “यदि हम बंगाल की जनता के चेहरे पर मुस्कान लौटाने में असफल रहे, तो हम दुर्गा पूजा उत्सव में हिस्सा नहीं लेंगे।” बनर्जी ने कहा, “कल, हमने घोषणा की कि जब तक राज्यपाल हमारे तृणमूल प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलते और 20 लाख मनरेगा लाभार्थियों की बकाया राशि जारी करने से संबंधित सवालों का जवाब नहीं देते तब तक हम बंगाल के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए यहां अपना शांतिपूर्ण धरना जारी रखेंगे।” उन्होंने कहा कि उन्हें पत्रकारों के माध्यम से पता चला कि राजभवन ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि ‘घेराव नहीं, घर आओ’।

बनर्जी ने कहा, “सबसे पहले मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि यह कोई घेराव नहीं है, जो द्वार पर होता है। राजभवन में कई द्वार हैं और हमने उनमें से किसी पर भी कब्जा नहीं किया है। दूसरा, जब राज्यपाल राजभवन में मौजूद नहीं है तो मैं उसके घर कैसे जा सकता हूं जो व्यक्ति अपने घर पर मौजूद नहीं है वह मुझे कैसे आमंत्रित कर सकता है? यदि निमंत्रण दिया जाता है, तो आमंत्रित व्यक्ति को जाना चाहिए। यदि मैं राजभवन जाता हूं तो मुझे दो मिनट लगेंगे, लेकिन उसे पहुंचने में चार घंटे लगेंगे।”
बनर्जी ने कहा, “केंद्र द्वारा उचित वेतन रोके जाने के बाद आम लोगों को राज्य मंत्री से मिलने का कोई अधिकार नहीं है? ये वह लोग हैं, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसदों को वोट दिया था जो बाद में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री बने और उन्होंने अन्य महत्वपूर्ण विभाग संभाले है। बंगाल की जनता ने भाजपा के 18 सांसदों को वोट देकर संसद में भेजा।’
उन्होंने कहा, “भाजपा ने कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है जिसमें कहा गया है कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह ध्यान भटकाने का नया एक तरीका है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह कल हमारे साथ कोलकाता की सड़कों पर उतरी जनसैलाब को देखकर चिंतित हैं और जनता अभी भी हमारे आंदोलन में शामिल है।”

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