शिमला : हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के गिरिपार क्षेत्र के अधिकांश गावों में बूढ़ी दिवाली का जश्न शुरू हो चुका है। तकरीबन एक सप्ताह तक मनाए जाने वाले इस त्यौहार को लेकर लोगों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही घर-घर मेहमाननवाजी का दौर भी शुरू हो गया है। बूढ़ी दीवाली पर नन्हे-मुन्ने बच्चों ने लकड़ियों से बनी मशालें (होला) जलाकर दशकों से चली आ रही परंपरा को निभाया। वहीं, पर्व को लेकर स्थानीय बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की जबदरस्त भीड़ उमड़ी रही।
बूढ़ी दिवाली का यह त्योहार सिरमौर जिले के गिरिपार, घणद्वार, आंजभौज, कमरऊ, मस्तभौज, जेलभौज, शिलाई, रोनहाट व संगड़ाह क्षेत्र के अलावा उत्तराखंड के जौनसार बाबर में भी मनाया जाता है। मंगलवार से शुरू हुए इस त्योहार पर असकली, घेंडा (मीठा आटा), बेढ़ोली, उलोले, गुलगुले, मूड़ा, तेलवा, शाकुली, तिल, भागंजीरा, चौलाई लडडू, सूखे मेवे आदि व्यंजन बनाये जाते है।
गौरतलब है कि बूढ़ी दीवाली को लेकर गिरिपार व पड़ोसी जौनसार के गांवों में एक माह से विशेष व्यंजन, मुड़ा, शाकुली व चिउड़ा बनाकर तैयार कर लिए जाते हैं। पहले धान को पानी में भिगोकर 10 दिन तक रखा जाता है। इसके बाद चिउड़ा बनाते थे।
हिमाचल में बूढ़ी दीवाली का जश्न शुरू, सात दिन चलेगा
