- निगम मुख्यालय सिविक सेंटर में ही ठेकेदार ने पीड़ित के साथ की गाली-गलौच
- पुलिस बुलाकर एसोसिएशन अध्यक्ष ने बचाई अपनी जान
नई दिल्ली। तिमारपुर इलाके में ट्रक/बस पार्किग ठेकेदार की दबंगई की वजह से बस व ट्रक मालिकों में दहशत का माहौल व्याप्त है। यहां तक कि तिमारपुर डीडीए मार्केट के व्यापारी भी काफी परेशान हैं। इस बाबत बुधवार को डीडीए मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष सिविक सेंटर में अधिकारियों से शिकायत करने पहुंचे हुए थे, जहां मौके पर मौजूद पार्किग ठेकेदार ने धमकी देते हुए मारपीट पर उतारू हो गया। अध्यक्ष ने 112 नंबर पर फोन को पुलिस को बुला लिया। पुलिस के पहुंचने पर मामला शांत हुआ। हालांकि देर शाम खुन्नस खाए पार्किग ठेकेदार के गुगरे ने पार्किग में मौजूद बस ड्राइवरों, कंडक्टरों व हेल्परों के साथ मारपीट शुरू कर दिया। कई लोगों को गंभीर रूप से चोटें आई हैं।
गौरतलब है कि निगम द्वारा ट्रक व बसों की पार्किग संचालित की जा रही है। इस पार्किग में ठेकेदार ने निगम द्वारा जो गाड़ियां खड़ी करने की संख्या दे रखी है, उससे दोगुनी संख्या से ज्यादा अवैध रूप से बस व ट्रक खड़े किए जा रहे हैं। इस मामले की शिकायत मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार को भारी पड़ गई। बुधवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष अपने कुछ साथियों के साथ सिविक सेंटर मुख्यालय के 25वीं मंजिल पर पार्किंग ठेकेदार की शिकायत करने पहुंचे थे। इसी दौरान मौके पर मौजूद ठेकेदार अपनी शिकायत दिए जाने से नाराज होकर एसोसिएशन के अध्यक्ष के साथ गाली-गलौच पर उतर आए। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह से मामले को शांत कराया, तब एसोसिएशन के अध्यक्ष ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन अपनी शिकायत दी। इसके साथ ही इसकी जानकारी उन्होंने आरपी सेल के डीसी अमित कुमार से भी की। एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है पुलिस के आने के बाद मामला शांत हो गया। इसके कुछ देर बाद ही पता चला कि तिमारपुर पार्किंग में एक बस ड्राइवर के साथ पार्किंग ठेकेदार के लड़कों ने लाठी-डंडे से जमकर पीटा। इससे नाराज वहां मौजूद बस ड्राइवर और कंडक्टरों ने भी जमकर हंगामा कर प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप था कि पार्किंग ठेकेदार मनमानी कर रहा है। मुंह मांगे पैसे मांग रहा है। पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने के दो घंटे के निगम द्वारा 80 रुपए चार्ज किए जाते हैं और 2 से 5 घंटे तक के 120 और 5 से 10 घंटे के 300, 10 घंटे से भी 24 घंटे के 500 लगते हैं, लेकिन लोगें का आरोप है कि पार्किग ठेकेदार चाहे दो घंटे लगाओ या 10 घंटे, 500 से 1000 रु पए वसूल कर रहा है। अगर कोई विरोध करता है तो मारपीट करने पर पार्किंग ठेकेदार के लड़के उतारू हो जाते हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार का कहना है कि पार्किंग ठेकेदार को निगम द्वारा केवल 184 ट्रक या बसों के अलावा 58 टाटा चैम्पियन छोटा हाथी लगाने की इजाजत है, लेकिन उसके बावजूद पार्किंग ठेकेदार तीन सौ से ज्यादा बसें और ट्रक लगा रहा है। इतना ही नहीं इस मार्केट में दुकानदारों के पास अगर कोई व्यक्ति स्कूटर या मोटर साइकिल से स्पेयर पार्ट्स का सामान लेने आता है तो उसकी जबरदस्ती पार्किंग ठेकेदार पर्ची काट रहे हैं। ट्रैवल्स पॉइंट के मालिक मुकेश ने बताया कि यह पार्किग अशोक कुमार के नाम पर अलॉट है, लेकिन इसकी देखरेख लखविंदर ठेकेदार कर रहा है। उन्होंने कहा कि एमसीडी अधिकारी और पुलिस की मिलीभगत से इसके खिलाफ कोई भी शिकायत होने पर कार्रवाई नहीं की जाती, उल्टा शिकायतकर्ता के विरुद्ध थाने में झूठा मामला बनाकर उसे तंग किया जाता है। हमारे संवाददाता ने जब इस पार्किंग का दौरा किया तो पाया कि किसी भी पार्किंग ठेकेदार के लड़कों ने न वर्दी पहन रखी थी, न वहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे और न ही पीली पट्टी। चारों तरफ कूड़े व गंदगी के ढेर लगे थे। लोगों का आरोप है कि आरपी सेल के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि हमने अवैध रूप से लगने वाले वाहनों व पार्किगों की जानकारी क्षेत्रीय डीसी और पुलिस को दे दी है। जल्द ही इन पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन आरपी सेल द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की जाती। इसको लेकर जनता नाराज है। इस संबंध में आरपी सेल के डीसी से अमित कुमार से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने मीटिंग में व्यस्त होने की वजह से जबाब नहीं दिया।
