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यमुना नदी के बढ़ते प्रदूषण पर महापंचायत में चिंता व्यक्त की गई

  • दिल्ली देहात के लोग 4 जून को जमुना किनारे मानव श्रृंखला बनाएंगे
  • लोक संसद को समर्थन देते हुए दिल्ली देहात के लोगों ने 4 जून को यमुना किनारे मानव श्रृंखला में शामिल होने का आव्हान किया है
  • ट्रैक्टर में भर कर आयेंगे यमुना किनारे

नयी दिल्ली : किसानों के हितों के लिए हमेशा आगे रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. नरेश कुमार ने कहा है कि यमुना नदी की सफाई के लिए पिछले आठ साल में करीब 700 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद यह एक गंदे नाले जैसी ही है और दिल्ली तथा केंद्र की भाजपा सरकार को जनता को जवाब देना चाहिए कि आखिर यह धनराशि कहां लुटाई गई है। मुंडका विधानसभा क्षेत्र के हिरनकूदना ग्राम में आज दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ कुमार के आवास पर दिल्ली देहात के गांवों की ओर से आयोजित एक महापंचायत में यमुना नदी के प्रदूषण को लेकर चिंता व्यक्त की गई। इस महापंचायत में कहा गया कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार ने यमुना की सफाई के नाम पर अब तक अरबों रुपए बहा दिए हैं लेकिन यह गंदे नाले के बराबर ही है। डॉ कुमार ने महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली सरकार ने बताया है कि 2013 से 23 अगस्त 2021 तक 653.86 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं लेकिन अब तक इसकी हालत पहले जैसी ही है और सारी धनराशि कागजों में खर्च हुई दिखती है। उन्होंने कहा कि हालत यह है कि यमुना में गंदे नाले लगातार गिर रहे है और यमुना प्रदूषित हो रही है जिसे रोकने में असमर्थ रही दिल्ली सरकार पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण- एनजीटी ने हाल में 6100 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में एनजीटी ने दिल्ली सरकार पर 900 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था और यह सब दिल्ली सरकार की अक्षमता के प्रमाण है।दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि 2015 के चुनावी घोषणा पत्र में उन्होंने यमुना नदी को लंदन की टेम्स नदी की तरह साफ़ कराने का वादा किया था लेकिन अभी भी यमुना नदी एक गंदे नाले के अलावा कुछ नहीं है। यहां छठ पर्व पर लोग पूजा करने से भी डरते हैं लेकिन दिल्ली की केजरीवाल और केंद्र की भाजपा सरकार को इसके बारे में कोई चिंता नहीं है। दोनों गूंगी बहरी सरकारों को सुनाने के लिए आगामी चार जून को एक विशाल मानव श्रृंखला बनाकर लोग अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

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