नई दिल्ली : राज्य सभा में शुक्रवार को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों के बीच टकराव जारी रहने तथा एक-दूसरे के खिलाफ हंगामा करने के कारण सदन की कार्यवाही करीब 40 मिनट तक नहीं हो सकी।
सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद सभापति जगदीप धनखड़ ने नियम 267 के तहत दिये गये पांच नोटिसों को अस्वीकार करने के घोषणा की जिसके बाद विपक्षी दलों के सदस्यों ने अपनी सीट से ही शोरगुल करना शुरू कर दिया। इसी दौरान कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण के जिस हिस्से को कार्यवाही से हटाया गया है, वह नियम के विरुद्ध है। इसलिए उस हिस्से को कार्यवाही में शामिल किया जाना चाहिए। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विश्वम ने कहा कि विपक्ष के नेता कोई गंभीर मुद्दा उठाना चाहते हैं, तो उन्हें उठाने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सभापति पद की गरिमा को जानते हैं। सभापति को रेफरी की भूमिका में रहना चाहिए,लेकिन कई बार वह खिलाड़ी की भूमिका में आ जाते हैं।
इसके बाद श्री खड़गे कुछ कहने के लिए खड़े हुए जिसका भाजपा के सदस्यों ने अपनी सीट से कड़ा विरोध किया। सभापति ने सत्तापक्ष के सदस्यों के आचरण पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कल उन्होंने बजट पर चर्चा कराने का प्रयास किया। वह किसी पक्ष की ओर नहीं देखते बल्कि संविधान को देखते हैं। सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि कल सदन में विपक्ष के कुछ वरिष्ठ नेताओं का अपमानजनक व्यवहार था। प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान व्यवधान हुआ। उनकी पार्टी ने कल विपक्ष के नेता से मांफी मांगने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि माफी मांगने के बाद ही कार्यवाही चलेगी। इसके बाद भाजपा के सदस्य मोदी-मोदी के नारे लगाने लगे।
हंगामे के दौरान ही खड़गे ने कहा कि हमारा गुस्सा सरकार पर होता है, सभापीठ पर नहीं। उन्होंने कहा कि उनके भाषण के जिन छह बिन्दुओं को कार्यवाही से निकाला गया है, उसमें कोई शब्द असंसदीय नहीं है। इसके बाद कांग्रेस के सदस्य हंगामा करने लगे। इस दौरान कांग्रेस के सदस्यों ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग को लेकर भी नारेबाजी की।
शोरशराबे के बीच ही सभापति ने शून्काल की घोषणा कर दी और इस दौरान कुछ सदस्यों ने अपने अपने मुद्दे उठाये।
सत्तापक्ष, विपक्ष के बीच टकराव जारी
