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बिरला से मुकाबले के लिए कांग्रेस ने उतारा गुंजल को

कोटा : राजस्थान में कोटा-बूंदी की प्रतिष्ठापूर्ण संसदीय सीट से कांग्रेस ने सोमवार को जारी अपने प्रत्याशियों की सूची में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल को प्रत्याशी बनाकर मुकाबला दिलचस्प कर दिया है।
संसदीय चुनाव में 70 के दशक में जनसंघ और बाद में भाजपा के वर्चस्व की छवि वाली रही कोटा-बूंदी संसदीय सीट वर्ष 2018 के पिछले लोकसभा चुनाव के बाद उस समय ‘आम से खास’ बन गई थी जब यहां से भाजपा के प्रत्याशी के रूप में लगातार दूसरी बार भारी मतों से चुनाव जीते ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष निर्वाचित हो गए थे।
इसी के साथ यह संसदीय सीट खास बन गई है, इसलिए इस बार भी क्योंकि यहां से केवल भाजपा के प्रत्याशी के रूप में श्री बिरला चुनाव नहीं लड़ रहे हैं बल्कि लोकसभा अध्यक्ष रहते हुए वे भाजपा के प्रत्याशी हैं। इस सीट की प्रतिष्ठा राजस्थान की शेष 24 लोकसभा सीटों से कहीं अधिक और रोचक भी है।
संसदीय क्षेत्र में कोटा एवं बूंदी जिलों की कुल आठ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं जिनमें कोटा जिले की कोटा उत्तर, कोटा दक्षिण, लाडपुरा, रामगंजमंडी, सांगोद, पीपल्दा जबकि बूंदी जिले की बूंदी, केशवरायपाटन विधानसभा सीटें शामिल हैं। नवंबर महीने में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों को मद्देनजर रखकर यदि आकलन किया जाए तो जिले की छह विधानसभा सीटों में से केवल दो सीटें कोटा उत्तर और पीपल्दा ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथ लगी थी जबकि भाजपा के हिस्से में चार सीटें कोटा दक्षिण, लाडपुरा,रामगंजमंडी, सांगोद आई थी जिसमें से सांगोद विधानसभा सीट भाजपा ने कांग्रेस से छीनी थी।
इसके विपरीत बूंदी जिले में भाजपा के नजरिए से स्थिति बिल्कुल नकारात्मक रही थी। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में बूंदी जिले की तीन विधानसभा सीटों में से दो बूंदी एवं केशवरायपाटन भाजपा ने जीती थी। कांग्रेस के हिस्से में केवल हिंड़ोली सीट आई थी। इस साल नवम्बर में हुए विधानसभा चुनाव में स्थिति पूरी तरह से बदल गई और जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का पत्ता साफ हो गया क्योंकि इस बार तीनों सीटें कांग्रेस ने भाजपा को हरा कर जीत ली। हालांकि कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में बूंदी जिले की दो ही विधानसभा सीटें ही शामिल है क्योंकि हिंड़ोली सीट भीलवाड़ा संसदीय सीट में शामिल हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की दृष्टि से उसके लिए एक सकारात्मक पहलू यह भी रहा कि दोनों जिलों में जिन मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, उन्होंने कांग्रेस की तुलना में भाजपा को कहीं अधिक वोट दिए।
कोटा जिले की छह विधानसभा सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव में जितने मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया, उनमें से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को पांच लाख 74 हजार 268 मत मिले जबकि इसकी तुलना में कांग्रेस को एक लाख 4 हजार 91 कम यानी पांच लाख 16 हजार 268 वोट ही हासिल हुए। भाजपा ने कोटा जिले में सीटे भी अधिक हासिल की तो मतदाताओं के वोट भी अधिक बटोरे।
इसके विपरीत बूंदी जिले में स्थिति उलट रही। जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा का पत्ता साफ हो गया जिसमें कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में शामिल दोनों सीटें बूंदी एवं केशवरायपाटन भी शामिल हैं। इन दोनों सीटों के चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले कुल तीन लाख 67 हजार 395 में से मतदाताओं में से दो लाख एक हजार 648 मतदाताओं ने कांग्रेस तो एक लाख 65 हजार 747 मतदाताओं ने भाजपा में विश्वास जताया था।

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