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कुशीनगर में आलू उत्कृष्टता केन्द्र का निर्माण कार्य शुरू

कुशीनगर : उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के कसया के बरवां फार्म में प्रदेश के दूसरे आलू उत्कृष्टता केंद्र का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए राज्य सरकार ने आठ करोड़ 59 लाख का बजट पास किया है। अभी कार्य शुरू करने के लिए तीन करोड़ 13 लाख की प्रथम किस्त जारी कर दी गई है। राज्य में इस तरह का यह दूसरा केन्द्र होगा। पहला केंद्र हापुड़ में है। केन्द्र का निर्माण कराने की जिम्मेदारी सेंट्रल लेबर डेवलपमेंट फेडरेशन को सौंपी गई है। सरकार ने 14 जून 2023 तक इस परियोजना को पूर्ण कर लेने की समय सीमा निर्धारित की है।
कुशीनगर में यह परियोजना लग जाने के बाद आलू की गुणवत्ता औद्योगिक प्रयोग के लिए बेहतर किस्म और नई प्रजातियों की खोज और उन्नतिशील संबंधी शोध किया जाएगा।

साथ ही आलू के फसल में लगने वाली बीमारियों से बचाने के लिए योजनाएं भी बनेंगे। इसमें तैयार किए गए एक आलू के कंद से 40 कंद तैयार होंगे। आलू उत्कृष्टता केंद्र में आलू की खेती के नई तकनीक की भी जानकारी मिल सकेगी। समय-समय पर कार्यशालाओं का आयोजन होगा। किसान कृषि विशेषज्ञ से अपनी समस्या पर चर्चा और उसका समाधान प्राप्त कर सकेंगे। केंद्र से शोधित बीज बोने से किसानों को काफी लाभ मिलेगा। पैदावार बढ़ेगी तो फसल भी रोग मुक्त होगी। इस बीज को बोकर किसान अधिक लाभ प्राप्त करेंगे।
गौरतलब है कि इस साल 28 अप्रैल को प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार तथा कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने इस परियोजना का शिलान्यास किया था। शिलान्यास के बाद राज्य सरकार ने उप्र राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड को कार्यदायी संस्था नामित किया, लेकिन किन्हीं कारणों से कंपनी ने निर्माण कार्य से हाथ खींच लिया। दूसरे निर्माण कंपनी के चयन में पूरे आठ माह लगे।

अब सीएलडीएफ कंपनी को निर्माण की जिम्मेदारी मिली है। कुशीनगर के जिला उद्यान अधिकारी कृष्ण कुमार ने कहा कि बरवां फार्म में बन रहा आलू उत्कृष्टता केंद्र पूर्वांचल के किसानों के लिए वरदान साबित होगा। उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर करने में यह मददगार होगा। यह केंद्र टीश्यू कल्चर और एयरोपोनिक्स तकनीक पर आधारित होगा। यह बीज रोग और कीट मुक्त रहेगा। केंद्र को विकसित करने में केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला और पंजाब के जालंधर स्थित सेंटर आफ एक्सीलेंस फार पोटैटो की तकनीक पर विकसित किया जा रहा है।

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