कोटा : राजस्थान के कोटा में 129वां दशहरा मेले में आज हजारों लोगों के विशाल जनसमुदाय की उपस्थिति के बीच ..असत्य पर सत्य की विजय.. के प्रतीक स्वरूप दशानन रावण संहिता कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। शहर के दशहरा मेला स्थल पर भगवान श्री लक्ष्मी नारायण जी के प्रतिनिधि के रूप में पुतलों के दहन की प्रक्रिया को पुरानी परंपरा के अनुसार कोटा के पूर्व राज्य परिवार के मुखिया इज्यराज सिंह ने निर्वहन किया।
इसके पहले पूर्व कोटा रियासत के महाराव इज्यराज सिंह और उनके परिवार की मेजबानी में गढ़ पैलेस सिटी पैलेस में ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार शाही ठाठ-बाट के साथ दरी खाना का आयोजन किया गया जिसमें पूर्व रियासत के कई राजपूत ठिकानेदार-जागीरदार परंपरागत वेशभूषा में सम्मिलित हुए। पूर्व राजपरिवार की ओर से आमंत्रित अतिथियों के अलावा कोटा के लगभग सभी वरिष्ठ पुलिस-प्रशासनिक एवं दोनों कोटा नगर निगम के अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
राजसी परंपरा के अनुसार दरी खाना के आयोजन के बाद पूर्व राजपरिवार के महाराव इज्यराज सिंह, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना देवी, उनके पुत्र कुंवर जयदेव सिंह के राजपुरोहित के निर्देशन में भगवान श्री लक्ष्मी नारायण की पूजा-अर्चना के बाद सेना,पुलिस राजस्थान सशस्त्र पुलिस बल (आरएसी) के बैंड सहित अन्य निजी बैंड-बाजे वालों के बैंड़ की धुनों के साथ उनकी सवारी गढ़ पैलेस से पूरे वैभव के साथ रवाना हुई।
वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण पिछले दो सालों से कोटा में इस राष्ट्रीय दशहरा मेला का आयोजन नहीं हो सका था। तीसरे साल इस बार मेले का आयोजन से लोगों में जबरदस्त उमंग एवं उत्साह देखने को मिला। भगवान श्री लक्ष्मी नारायण की गढ़ पैलेस से लेकर किशोरपुरा स्थित दशहरा मैदान स्थल तक पहुंचने के दौरान पुलिस की ओर से सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे।
पूर्व सांसद श्री इज्यराज सिंह फूलों से सजी खुली जीप में सवार होकर पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे थे और उन लोगों का अभिवादन करते-स्वीकारते चल रहे थे। रावण दहन स्थल पर पहुंचने के बाद श्री इज्यराज सिंह ने ज्वार, माता सीता और कलश पूजन किया। इसके बाद उन्होंने भगवान श्री लक्ष्मी नारायण जी के प्रतिनिधि के रूप में अमृत कलश का भेजन कर रावण के पुतलों का दहन किया।
