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दिल्ली कूच:भाकियू चढूनी के जिलाध्यक्ष समेत पदाधिकारी नजरबंद

अमरोहा : उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद से किसान आन्दोलन के लिए ‘दिल्ली कूच’ में जुटे भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के जिलाध्यक्ष नरेश चौधरी समेत कई अन्य पदाधिकारियों को पुलिस ने मंगलवार को ‘नजरबंद’ कर लिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि संभावित त्योहारों तथा किसान आन्दोलन के मद्देनजर जनपद में धारा-144 लागू है। किसान आन्दोलन में शामिल होने के लिए ‘दिल्ली कूच’ की तैयारियों में जुटे भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के जिलाध्यक्ष नरेश चौधरी को मंगलवार की सुबह सात बजे पुलिस कर्मियों ने बताया कि उन्हें नजरबंद किया गया है।
थाना प्रभारी निरीक्षक गजरौला हरीशवर्धन सिंह, सिटी इंचार्ज अरुण गिरि पुलिस बल के साथ अवंतिका नगर रोड़, चौधरी चरण सिंह नगर में स्थित भाकियू चढ़ूनी के जिलाध्यक्ष के घर को चारों ओर से घेरकर प्रमुख पदाधिकारियों समेत जिलाध्यक्ष नरेश चौधरी को बताया गया कि उन्हें नजरबंद कर लिया गया है।
भाकियू चढूनी के प्रवक्ता ने मंगलवार को यहां पत्रकारों को बताया कि भाकियू चढूनी जिलाध्यक्ष नरेश चौधरी पर सोमवार से ही आन्दोलन में शामिल नहीं होने के लिए मान-मनौव्वल के साथ साथ दबाव बनाया जा रहा था। इसी सिलसिले में बीती रात लगभग डेढ़ बजे पुलिस क्षेत्राधिकारी श्वेताभ भास्कर तथा इंस्पेक्टर गजरौला पूरे दलबदल के साथ भाकियू नेता नरेश चौधरी के घर का दरवाज़ा खटखटाया था और ‘दिल्ली कूच’ की तैयारियों के बारे में जानकारी प्राप्त की थी।
भाकियू जिलाध्यक्ष नरेश चौधरी ने बताया कि देश में सबसे अधिक रोज़गार देने की क्षमता रखने वाले कृषि क्षेत्र की अनदेखी से न केवल किसानों पर संकट छाया हुआ है बल्कि दिनों-दिन बेरोज़गारी और बढ़ रही है। खेती किसानी से जुड़े बेरोज़गार नौजवानों में हताशा घर कर गई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ़ तो किसानों की आय दोगुनी करने के वायदे, वहीं दूसरी ओर खेती को कारपोरेट घरानों को सौंपने की सरकार की मंशा,हाल के अंतरिम बजट में परिलक्षित हो गई है। मौजूदा सरकार में गांव, गरीब और किसान की लूट जारी है।पूंजीपतियों को लाभ की नीति के तहत, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)गारंटी का प्रावधान अंतरिम बजट में नहीं किया गया। पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों और तहसीलों में व्याप्त भृष्टाचार, सरकारी शोषण चरम पर है। इसलिए पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों का सरकारी लूट के प्रति आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है,ले देकर किसानों के पास आंदोलन ही सहारा बचा है उसे भी सरकार छीन लेना चाहती है। ऐसे में किसान जाएं तो कहां जाएं।मध्य रात्रि में पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट कर कृषि प्रधान देश भारत मे किसानों की आवाज़ दबाने के तरह-तरह के हथकंडों से उनके आंदोलन करने का हक़ भी सरकार छीन लेना चाहती है।

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