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डीटीयू के गोल्डन प्राइड समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को बांटे प्रमाण पत्र और पदक

दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) में 24 अक्तूबर को देर सांय छटे गोल्डन प्राइड समारोह का आयोजन किया गया। डीटीयू के गोल्ड मेडलिस्टों एवं पीएचडी अवार्डियों के सम्मान में आयोजित इस समारोह में एम्स के निदेशक प्रो. रणदीप गुलेरिया मुख्यातिथि के तौर पर उपस्थित रहे जबकि और पावर सिस्टम ऑपरेशन कार्पोरेशन (POSOCO) के चेयरमैन एवं एमडी एस. आर. नरसिम्हा ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। उनके साथ प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व प्रमुख (आईपीएस सेवानिवृत्त) करनल सिंह विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र और पदक वितरित किए गए तथा उनके सम्मान में विश्वविद्यालय की ओर से रात्रि भोज का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यातिथि के रूप में बोलते हुए प्रो. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान तकनीक ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

प्रो. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि तकनीक और चिकित्सा विज्ञान का नजदीकी संबंध है। अब चिकित्सा के विद्यार्थी इंजीनियरों के साथ मिलकर तकनीक को समझ रहे हैं। उन्होने कहा कि वक्त तेजी से बदल रहा है और बदलते वक्त के साथ तकनीक में भी परिवर्तन आ रहा है। ऐसे में जरूरी है कि एक दूसरे के साथ प्रयाप्त संवाद रखें और एकीकृत रूप से अनुसंधान को बढ़ावा दें। उन्होने कहा कि अब टेले कंसल्टेंसी का दौर आ रहा है। इसमें भी तकनीक की प्रधानता है। रोग निदान से लेकर टेस्टों तक तकनीक का प्रयोग हो रहा है। ऐसे में तकनीक का सटीक होना भी बहुत जरूरी है। अगर जरा भी गड़बड़ी हो जाए तो इलाज प्रभावित हो सकता है। इसलिए जो लोग अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं उन्हें भी निरंतर सीखना जारी रखना होगा और रिसर्च पर ध्यान देना होगा। अपने संबोधन के अंत में उन्होने पदक विजेताओं और पीएचडी अवार्डियों तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों के अभिभावकों को शुभकामनाएं दी।

समारोह के विशिष्ट अतिथि एस. आर. नरसिम्हा ने 30 वर्ष बाद अपनी मातृ शिक्षण संस्था में पहुँचने पर हार्दिक खुशी जाहीर की। उन्होने अपने संबोधन के दौरान बिजली के राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय ग्रिड सिस्टम को लेकर जानकारी दी और बताया कि वक्त के साथ ऊर्जा की जरूरतों में बहुत ज्यादा बदलाव आया है। एक दौर था जब रात में बिजली की खपत शून्य के बराबर होती थी क्योंकि लोग घरों की छतों पर अथवा बाहर सोते थे, लेकिन एसी तकनीक के आने के बाद अब रात में 11 बजे के बाद बिजली की खपत बहुत ज्यादा होती है। उन्होने कहा कि बदलते वक्त के साथ कुछ किस्म के रोजगार कम होंगे तो कुछ नई क़िस्मों के रोजगार पैदा भी होंगे। नरसिम्हा ने डिग्री पूरी करके निकलने वाले विद्यार्थियों को सुझाव दिया कि वक्त के साथ कदमताल करके चलें और अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्रों से आगे निकाल कर अन्य क्षेत्रों में भी अपनी निपुणता को बढ़ाएं। इसके साथ ही उन्होने पाठ्यक्रम से अलग गतिविधियों में भाग लेने का सुझाव भी दिया। 

उनसे पूर्व डीटीयू कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी ने गोल्ड मेडलिस्टों एवं पीएचडी अवार्डियों सहित स्कोलरशिप और मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अपनी और से बधाई दी। उन्होने अपने संबोधन में कहा कि समूहिक रूप से टीम वर्क करने पर सफलता अधिक मिलती है। अकेला व्यक्ति एक बूंद के समान होता है, लेकिन जब वे संगठित होते हैं तो सागर बन जाते हैं। सागर की शक्ति नि:संदेह बूंद की अपेक्षा अधिक होती है। उन्होने डीटीयू से शिक्षा प्राप्त करके निकलने वाले विद्यार्थियों से कहा कि डीटीयू ने आपको बहुत कुछ दिया है, अब आपके पास इसे लौटाने का समय होगा। उन्होने विश्वास जताया कि जैसे पहले से एल्यूमनी डीटीयू के नाम को रोशन कर रहे हैं, इसी प्रकार ये विद्यार्थी भी डीटीयू और अपने परिजनों का नाम रोशन करेंगे। समारोह के आरंभ में डीएसडबल्यू प्रो. एस. इन्दु और डीन एल्यूमनी अफेयर्स प्रो. राजेश रोहिला ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह के अंत में डीटीयू कुलसचिव प्रो. मधुसूदन सिंह ने समारोह के समापन पर सभी का आभार ज्ञपित किया। इस अवसर पर वर्ष 2021-2022 के लिए विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत 45 विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट और पदकों का वितरण किया गया। इसके साथ ही स्कोलरशिप ब्रोशर का विमोचन भी किया गया।

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