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इग्नू में 300,000 लाख से अधिक डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाणपत्रों का वितरण

नई दिल्ली : इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) द्वारा एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में आज अपने 37वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इग्नू द्वारा इस अवसर पर 308,605 डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। दीक्षांत समारोह का आयोजन इग्नू के प्रतिष्ठित बाबा साहेब अंबेडकर सभागार, इग्नू, मैदान गढ़ी परिसर में किया गया। इस अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। माननीय मुख्य अतिथि ने सभागार में उपस्थित शिक्षार्थियों को अपने प्रेरणादायक शब्दों से संबोधित किया।

अपने दीक्षांत भाषण में, माननीय उपराष्ट्रपति ने देश भर में फैले इग्नू शिक्षार्थियों के अथक प्रयासों और अटूट समर्पण को मान्यता देते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी। उन्होंने सर्वांगीण व्यक्तियों के निर्माण में इग्नू द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हुए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उल्लिखित उद्देश्यों के अनुरूप, उच्च शिक्षा में समानता, समावेशिता और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने पर लक्षित इग्नू की प्रतिबद्धता की सराहना की।

माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा इस अवसर पर मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया और साथ ही, 3.08 लाख डिग्री/डिप्लोमा/प्रमाणपत्रों का वितरण किया गया। इग्नू के 7.5 मिलियन पूर्व छात्रों के सुदृढ़ नेटवर्क की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए माननीय उपराष्ट्रपति ने खासतौर पर अमृत काल- नए भारत के विजन 2047 को साकार करने में एक उत्प्रेरक के रूप में इग्नू की क्षमता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने यूपीआई, मोबाइल प्रौद्योगिकी और डीपीआई जैसे नवीन पहलुओं में डिजिटल अवसंरचना एवं उन्नयन की महत्व की चर्चा करते हुए, जी-20 जैसे सम्मेलनों में खासतौर पर ग्लोबल साउथ देशों से समावेशी भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।

उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहित करते हुए, उन्होंने स्नातकों से नए अवसरों की छानबीन करने, स्टार्टअप स्थापित करने और नवाचार के साथ आगे बढ़ने की बात कही और अपने भाषण में माननीय उपराष्ट्रपति ने आगे आईओटी, एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों से जूझने और निरंतर सीखते हुए इनसे आत्मसात करते हुए आगे बढ़ने पर जोर दिया।
माननीय उपराष्ट्रपति ने भारत के भविष्य के निर्माता के रूप में शिक्षार्थियों की भूमिका को मान्यता देते हुए आग्रह किया कि वे यथास्थिति को चुनौती देने के लिए अपनी विशिष्टता से आत्मसात करे और निडर होकर अपने सपनों को आगे बढा़एं और देश की नियति को एक नया रूप रंग दें।
प्रोफेसर नागेश्वर राव, कुलपति, इग्नू ने इस अवसर पर माननीय उपराष्ट्रपति को अवगत कराते हुए कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इग्नू ने पिछले वर्ष कई नई पहल शुरू की हैं। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से बहु-विषयक और समग्र शिक्षा को अपनाने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उल्लिखित दृष्टिकोण से आत्मसात करने की दिशा में इग्नू निरंतर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रतिबद्धता, व्यवसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा, शोध एवं नवाचार, भारतीय भाषाओं का संवर्धन और आईसीटी सक्षम शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों के प्रति विस्तारित है। उन्होंने आगे कहा कि खासतौर पर हमारे देश के सुदूरतम कोनों तक पहुंच स्थापित करने और सुविधावंचितों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में इग्नू के सजग प्रयासों को उजागर करने में मुझे बेहद खुशी हो रही है। इग्नू समावेशन के माध्यम से देश में समता को बढ़ावा देने में दूर शिक्षा तक पहुंच स्थापित करने के अपने मिशन पर अटल है। उन्होंने कहा कि ये प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में निर्धारित परिवर्तनकारी लक्ष्यों को साकार करने के प्रति इग्नू के समर्पण को उजागर करते हैं।
दीक्षांत समारोह, पहुंच और समावेशिता के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए देशभर में संस्थापित इग्नू क्षेत्रीय केंद्रों पर एक साथ आयोजित किया गया और ज्ञान दर्शन चैनल, ज्ञान वाणी, यूट्यूब और सोशल मीडिया चैनलों सहित विभिन्न प्लेटफार्मों पर इसका सीधा प्रसारण किया गया।

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