लखनऊ : बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 और निजीकरण नीतियों के खिलाफ शुक्रवार को देश भर में पैमाने पर प्रदर्शन का दावा किया है। आल इण्डिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे और महासचिव रत्नाकर राव ने बयान जारी कर कहा कि बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) के आह्वान पर बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने केन्द्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए आज सभी राज्यों की राजधानियों, बिजली उपयोगिता मुख्यालयों और परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और विरोध सभाएं की।
उन्होने बताया कि हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, विजयवाड़ा, त्रिवेन्द्रम, कोलकाता, लखनऊ, पटियाला, शिमला, चंडीगढ़, देहरादून, जम्मू, श्रीनगर, जबलपुर, भोपाल, रायपुर पुणे, मुंबई,वडोदरा, राजकोट, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, शिलांग, रांची, पटना और कई प्रमुख थर्मल पावर स्टेशनों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।
श्री दुबे ने आरोप लगाया कि संयुक्त किसान मोर्चा को सरकार की लिखित प्रतिबद्धता के बाद भी बिजली (संशोधन) विधेयक 2022 को रद्द करने की मांगों का पालन नहीं किया गया है। इसके विपरीत, बिजली की सार्वभौमिक पहुंच के अधिकारों पर अंकुश लगाने के लिए उपभोक्ताओं के परिसर में प्रीपेड स्मार्ट मीटर गैरकानूनी तरीके से लगाए गए हैं। बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में अगले कदम के रूप में ट्रांसमिशन सबस्टेशनों की स्थापना के लिए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली निर्धारित की गई है।
बिजली इंजीनियरों ने किया देशव्यापी प्रदर्शन का दावा
