सिरसा : हरियाणा के सिरसा जिले में घग्घर नदी के जलस्तर में हरियाणा व पंजाब के सरहद के कस्बा सरदूलगढ़ में दो से ढाई फीट की गिरावट दर्ज की गई है,जिसे राहत के तौर देखा जा रहा है। मगर पचंकुला क्षेत्र में बरसात का ठहर-ठहर कर होना खतरे की घंटी है इसलिए तटबंधों पर सतर्कता व उनकी मजबूती अभी भी जरूरी है। हर रोज की अपेक्षा कम मगर तटबंधों की मजबूती के लिए आज भी ग्रामीण जुटे हुए थे।
सिरसा के उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि अभी भी जलस्तर खतरे के निशान पर है, इसलिए सतर्कता बरते हुए जिला प्रशासन विभिन्न विभागों के माध्यम से हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। स्वास्थ्य व पशु पालन विभागों को प्रभावित एरिया में लोगों व पशुओं के इलाज के लिए निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार करीब 10 से 12 दिन से तटबंधों की मजबूती के लिए काम किया गया है। उसी प्रकार संबंधित गांवों के लोग व डयूटी पर तैनात अधिकारी व कर्मचारी अभी भी अपना मनोबल मजबूत रखें तथा तटबंधों की निगरानी व ठीकरी पहरा जारी रखें।
उपायुक्त ने संबंधित एसडीएम को निर्देश दिए कि वे फील्ड में रहें तथा ग्रामीणों से लगातार संपर्क बनाए रखें तथा ड्यूटी पर तैनात अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी घग्घर के तटबंधों की निगरानी रखें तथा कमजोर प्वाइंटों को मजबूत बनाने के लिए कार्य जारी रखें। उन्होंने किसानों से अपील की है कि घग्घर नदी में किसी भी प्रकार की पाइपलाइन न डालें तथा न ही तटबंधों को कोई नुकसान पहुंचाएं। ऐसा करने से तटबंध कमजोर होंगे, जोकि किसी खतरे का कारण बन सकते हैं।
उन्होंने बताया कि एक बार सरदूलगढ़ में पानी का जलस्तर 58 हजार क्यूसिक तक पहुंच गया था, जो कि औसत से काफी अधिक था। इस कारण कई दिन तक जिला में पानी की अधिक मात्रा आने से गंभीर स्थिति बन गई थी, लेकिन लोगों के सहयोग से इस स्थिति से निपटना संभव हो पाया।
