दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति के लिए केंद्र को दे निर्देश
नई दिल्ली : किसानों को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की गुहार लगाते हुए एक याचिका उच्चतम न्यायालय में दायर की गई है। सिख चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रबंध निदेशक एग्नोस्टोस थियोस की ओर से दायर जनहित याचिका में आंदोलनकारी किसानों के दिल्ली में प्रवेश रोकने के लिए सड़कों से की गई बैरिकेडिंग हटाने का निर्देश केंद्र सरकार को देने की गुहार लगाई गई है। उन्होंने आंदोलनकारी किसानों के जबरन बंद किए गए सोशल मीडिया खातों को चालू करने का निर्देश केंद्र सरकार को देने की याचना की है।
याचिका में दावा किया गया है कि किसानों को बिना किसी उचित कारण के राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने से रोकना देशभर में स्वतंत्र रूप से यात्रा करने के (संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (डी) में निहित) उनके अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार के अलावा हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और दिल्ली सरकारों और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पक्षकार बनाया है।
याचिका में दावा किया गया है कि राज्य सरकारों ने शांतिपूर्वक विरोध कर रहे किसानों के खिलाफ आंसू गैस, रबर बुलेट छर्रों, समाप्त हो चुके गोले आदि के उपयोग जैसे आक्रामक और हिंसक उपायों को अपनाया, जिससे किसानों को गंभीर और गंभीर चोटें आई हैं।
दावा किया गया कि, “राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर किलेबंदी करके अपने ही शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण और हिंसक स्थिति पैदा कई है। इस तरीके से किसानों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने की अनुमति से वंचित कर राज्य सरकारों द्वारा की गई कार्रवाइयों के कारण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हिंसा हुई है।”
यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण किसानों को केवल अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के प्रयोग करने के लिए अपनी ही सरकार द्वारा आतंकवादियों जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है। याचिका में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों के संविधान के अनुच्छेद 14, अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि किसानों ने 13 फरवरी को ‘दिल्ली चलो’ के अपने आह्वान के तहत स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने की अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया।
इसके मद्देनजर, “केंद्र और राज्य सरकारों ने विरोध में भाग लेने वाले लोगों को धमकाया। दिल्ली के चारों ओर राज्य की सीमाओं को लोहे की कीलों, कंक्रीट की दीवारों आदि से मजबूत कर दिया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि किसान राष्ट्रीय राजधानी के क्षेत्र में प्रवेश न कर सकें।”
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि दिल्ली की सीमाओं से लगे राज्यों से अपने निजी वाहनों से भी अपने अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन करने आ रहे किसानों को जबरदस्ती गिरफ्तार किया गया और हिरासत में लिया गया। इसी तरह, प्रदर्शनकारी किसानों में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से आ रहे किसानों को भोपाल, मध्य प्रदेश में हिरासत में लिया गया और उन्हें अन्य राज्यों में भी भेजा गया, ताकि वे प्रदर्शनकारी किसानों से न मिलें।
